Agra, Uttar Pradesh, India. नैमिनाथ हम्योपैथी मेडिकल कॉलेज आगरा ने रोगियों के उपचार की नई तकनीक विकसित की है। यह तकनीक संभवतः कहीं और प्रयोग में नहीं लाई जा रही है। इसके तहत मरीजों का सारा काम चिकित्सक करते हैं। फिर भले ही मरीजों को टहलाना हो, गोद में उठाकर बैठाना हो, बिस्तर पर लिटाना हो या ग्लूकोज चढ़ाना हो। है न अद्भुत तकनीक। इस तकनीक का रोगियों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।
हाथरस के अशोक कुमार जैन की कहानी
आज हम बात कर रहे हैं हाथरस निवासी अशोक कुमार जैन की। अनायास ही इन पर नजर पड़ी। वॉकर के साथ चल रहे थे। साथ में एक चिकित्सक भी थे। जिज्ञासा हुई। पूछा कि कहां से आए हैं तो बताया- हाथरस से आए हैं। शनिवार को आए थे। उठा-बैठा भी नहीं जाता था। आठ दिन बाद ही चलने लगे हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी।
तीमारदार ने बोला – थैंक यू डॉक्टर साहब
रोगी अशोक कुमार जैन की पत्नी मधु जैन से बात हुई तो उन्होंने बताया- आगरा में पाइल्स (बवासीर) का आगरा में ऑपरेशन कराया। इसके बाद उन्होंने बिस्तर पकड़ा तो उठ ही नहीं पाए। जनवरी, 2021 से बिस्तर पर ही शौच। उसका भी होश नहीं। न उठ पाते न बैठ पाते। साथ ही मानसिक रोगी हो गए। आगरा में इलाज किया। कुछ दिन मानसिक रोग शांत रहा और फिर से वही समस्या। किसी ने नैमिनाथ हम्योपैथी मेडिकल कॉलेज आगरा का पता दिया। पांच जून को यहां आ गए। आठ दिन में ही ठीक हो रहे हैं। मधु जैन ने नैमिनाथ हॉस्पिटल, डॉक्टर और यहां के स्टाफ को धन्यवाद दिया है।
क्या कहते हैं प्राचार्य डॉ. प्रदीप गुप्ता
हमने इस बारे में बात की नैमिनाथ हम्योपैथी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप गुप्ता से। उन्होंने बताया कि पाइल्स के ऑपरेशन का असर हृदय पर होता है। जब अशोक कुमार जैन यहां आए तो हमें खुशी इस बात की हुई कि ऐसा मरीज आया है, जिसे कोई अन्य चिकित्सक ठीक नहीं कर पाया है। होम्योपैथी की आर्निका दवा ने बहुत अच्छा काम किया। किसी अन्य चिकित्सा पद्धति में जाता तो हजारों रुपये के पैथालोजी और डायग्नोस्टिक परीक्षण ही हो जाते। अशोक कुमार जैन को हुई बीमारी का नाम क्या है, यह किसी को पता नहीं है। होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर उपचार होता है। पैथालोजी परीक्षणों की प्रायः जरूरत नहीं होती है। कभी-कभी लमरीज की संतुष्टि के लिए परीक्षण कराए जाते हैं। कोरोना मरीजों के उपचार के दौरान भी हमने परीक्षण नहीं कराए थे।
कोरोना के 300 से अधिक मरीज स्वस्थ हुए
यहां यह बताना आवश्यक है कि कोरोना मरीजों को प्राचार्य डॉ. प्रदीप गुप्ता अपनी गोद में उठाते थे और उनसे गले मिलते थे। इस तरह का भावनात्मक रिश्ता बनाने से मरीजों शीघ्र स्वस्थ हुए। कोरोना के इलाज में होम्योपैथी दवा ने गजब का काम किया है। यहां कोरोना के 300 से अधिक मरीजों के स्वस्थ होने से सिद्ध हो चुका है।
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