नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के बाहर और भीतर तीखा विरोध प्रदर्शन किया। काले कपड़े पहनकर विरोध जताने पहुंचीं ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के बाद आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
“58 लाख लोगों के नाम हटाए, बचाव का मौका नहीं दिया”
मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया से कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में इतना ‘घमंडी’ और ‘झूठा’ चुनाव आयुक्त नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में सुनियोजित तरीके से 58 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। ममता ने पूछा “बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? आपने लोगों को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया।”
एसआईआर (SIR) पर दोहरा मापदंड?
ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया की टाइमिंग और चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे चुनाव वाले राज्यों में लागू करने के पीछे गलत मंशा है। उन्होंने तंज कसा “असम में बीजेपी की सरकार है, वहां आपने एसआईआर नहीं किया, लेकिन बंगाल और तमिलनाडु में कर दिया। अगर आपको यह करना ही था, तो सही प्लानिंग के साथ करते।”
बर्थ सर्टिफिकेट विवाद और पीएम पर तंज
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मांगे जा रहे दस्तावेजों पर ममता बनर्जी ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2022 के मानकों के हिसाब से पुराने लोगों से पिता का बर्थ सर्टिफिकेट मांगना नामुमकिन है। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा “अपने प्रधानमंत्री से पूछिए कि क्या उनके पास अपने माता-पिता के इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी सर्टिफिकेट (अस्पताल के जन्म प्रमाण पत्र) हैं?”
सुरक्षा और पुलिस तैनाती पर सवाल
ममता बनर्जी ने बंग भवन परिसर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती को ‘धमकी’ करार दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को नहीं, बल्कि उन्हें निर्देश देने वाले ‘ऊपर बैठे लोगों’ को दोषी मानती हैं।
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