भारत–यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने दक्षिण एशिया के दो बड़े निर्यातक देशों, पाकिस्तान और बांग्लादेश, की चिंता बढ़ा दी है। अब तक यूरोपीय बाजार में जिन्हें टैरिफ छूट और विशेष पहुंच का फायदा मिलता रहा, उन्हें डर है कि भारत की एंट्री से उनका बढ़त वाला खेल कमजोर पड़ सकता है।
अब तक व्यवस्था यह थी कि EU आने वाले भारतीय सामानों पर मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) टैरिफ लगते थे। यानी वही स्टैंडर्ड, गैर-भेदभाव वाले शुल्क जो WTO सदस्य देश एक-दूसरे पर लगाते हैं। लेकिन नए समझौते के बाद भारतीय उत्पादों, खासकर टेक्सटाइल, को यूरोप में बेहतर टैरिफ छूट मिलने का रास्ता खुल गया है।
ढाका और इस्लामाबाद में हलचल
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने EU के साथ जल्दी फ्री ट्रेड डील की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने ढाका में EU के राजदूत माइकल मिलर और यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की चेयरपर्सन नूरिया लोपेज से मुलाकात कर इस दिशा में पहल की। संदेश साफ है कि बांग्लादेश अपने निर्यात हितों को सुरक्षित करना चाहता है।
पाकिस्तान में भी कारोबारी हलकों से सरकार को चेतावनी मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यूरोप के साथ समय पर नया समझौता नहीं हुआ तो टेक्सटाइल सेक्टर पर सीधा असर पड़ेगा। पाकिस्तानी अखबारों में इसे “आर्थिक मोर्चे” की तरह पेश किया जा रहा है, जहां भारत ने नई चाल चल दी है।
क्यों बढ़ी चिंता
पाकिस्तान और बांग्लादेश को लंबे समय से यूरोपीय बाजार में खास रियायतें मिलती रही हैं। पाकिस्तान को जनरलाइज़्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंस (GSP Plus) का लाभ मिला हुआ है, जबकि बांग्लादेश को “Everything But Arms” व्यवस्था के तहत लगभग ड्यूटी-फ्री एक्सेस हासिल है। बांग्लादेशी परिधान शून्य टैरिफ पर यूरोप पहुंचते हैं, जबकि पाकिस्तान को भी न्यूनतम शुल्क देना पड़ता है।
इन रियायतों ने दोनों देशों की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मजबूती दी और विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा जरिया बनाया। लेकिन अगर भारतीय टेक्सटाइल को भी समान या बेहतर टैरिफ छूट मिलती है, तो प्रतिस्पर्धा तेज होगी और पुराने फायदे घट सकते हैं।
पाकिस्तान का EU पर निर्भर निर्यात
EU पाकिस्तान के लिए अहम बाजार है। पाकिस्तान अपने कुल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा यूरोप में बेचता है। 2024 में EU, पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा और कुल व्यापार में उसकी हिस्सेदारी 12.4% रही। दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 12 बिलियन पाउंड तक पहुंचा।
आगे क्या
स्थिति अभी बदलती वैश्विक व्यापार रणनीतियों का संकेत दे रही है। भारत–EU डील से दक्षिण एशिया में प्रतिस्पर्धा का नया दौर शुरू हो सकता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए चुनौती साफ है: या तो अपने समझौते मजबूत करें या यूरोपीय बाजार में हिस्सेदारी घटने का जोखिम उठाएं।
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