नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में अरब देशों के विदेश मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर भारत-अरब संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया। बैठक में पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की कोशिशों में अरब लीग की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में रचनात्मक संवाद और सहयोग का लगातार समर्थन करता रहेगा। साथ ही उन्होंने फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत की पारंपरिक प्रतिबद्धता दोहराई और गाजा से जुड़े शांति प्रयासों का स्वागत किया।
भारत मंडपम में हुई इस उच्चस्तरीय मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि आने वाले वर्षों में भारत-अरब साझेदारी को व्यापार, निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में और मजबूत किया जाएगा। उनका कहना था कि यह संबंध सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के बीच भरोसे और साझी विरासत पर टिका है।
बैठक दूसरे भारत-अरब विदेश मंत्री सम्मेलन के अवसर पर हुई, जिसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात कर रहे हैं। लगभग एक दशक बाद इस स्तर की बैठक हो रही है। इससे पहले ऐसी बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित हुई थी।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह मंच भारत और अरब देशों के बीच संस्थागत सहयोग का सबसे बड़ा ढांचा है। मार्च 2002 में भारत और अरब लीग के बीच हुए समझौते के बाद से यह संवाद औपचारिक रूप ले चुका है और अब इसे नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस दौर की वार्ताएं मौजूदा सहयोग को और गहरा करेंगी और आने वाले समय में साझेदारी को ठोस परिणामों तक पहुंचाएंगी।
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