हिंदी के विकास से ही राष्ट्र होगा समृद्ध: अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती की नई जिला कार्यकारिणी का गठन
स्थान और आयोजन
Live Story Time, Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
आगरा के वायु विहार चौराहे के पास स्थित राज राजेश्वरी रिसोर्ट में गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती की जिला स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चाहर ने की, जिसमें संगठन की नई जिला कार्यकारिणी का विधिवत गठन किया गया।
हिंदी और भारतीय संस्कृति पर जोर
बैठक के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती भारतीय संस्कृति, जीवन दर्शन और सनातन मूल्यों के संरक्षण व प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने संगठन को और अधिक सक्रिय, व्यापक और प्रभावी बनाने पर बल दिया।
संत, शिक्षण और समाज के हर वर्ग की भागीदारी
डॉ. देवी सिंह नरवार ने कहा कि हिंदी साहित्य भारती केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की संस्कृति और सनातन परंपरा की रक्षा का भी सशक्त माध्यम है। इसी उद्देश्य से संस्था में संत, शिक्षक, पत्रकार और अधिवक्ताओं को भी जोड़ा गया है, ताकि हिंदी जन-जन तक पहुंचे।
हिंदी भारत का प्राण है: डॉ. भानु प्रताप सिंह
विशिष्ट अतिथि, हिंदी साहित्य भारती ब्रज प्रांत उपाध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार एवं वेलनेस कोच डॉ. भानु प्रताप सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा—
“हिंदुस्तान में हिंदी दिवस, हिंदी का अपमान है।
भारत हिंदी है और हिंदी भारत है।
हिंदी भारत का प्राण है।”
उन्होंने कहा कि हिंदी आज भी आधिकारिक रूप से भारत की संपर्क भाषा नहीं बनाई गई है, जबकि व्यवहार में यही देश की सबसे बड़ी संपर्क भाषा है। कुछ राजनेता अपने स्वार्थ के चलते हिंदी का विरोध करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हिंदी पूरे भारत में बोली और समझी जाती है।
युवाओं से आह्वान
डॉ. भानु प्रताप सिंह ने युवाओं से हिंदी भाषा और साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक युवा हिंदी के साथ खड़े नहीं होंगे, तब तक भाषा को उसका वास्तविक सम्मान नहीं मिल सकता।

नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा
बैठक के अंत में डॉ. देवी सिंह नरवार ने अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा की।
सुरेश सिंह चाहर, राजवीर सिंह चाहर, जवाहर सिंह ठैनुआ एवं हरिओम ठैनुआ को जिला संरक्षक बनाया गया।
पंडित देवेश शर्मा को कार्यकारी जिलाध्यक्ष तथा तेजपाल सिंह सोलंकी को महामंत्री नियुक्त किया गया।
रवि चौधरी, पवन कुमार रावत, कुमरपाल सिंह चाहर, वीरेंद्र सिंह, थानसिंह एवं जयसिंह कुशवाह को उपाध्यक्ष बनाया गया।
नरेश कुमार वर्मा को संगठन महामंत्री, दीपक सिंह, अमरेश कुमार बघेल और बृजेश खिरवार को संयुक्त महामंत्री, राजकुमार को मंत्री तथा सूरज सिंह इंदौलिया को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
संपादकीय
हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। ऐसे समय में जब हिंदी को लेकर भ्रम और राजनीति दोनों चल रही हैं, तब डॉ. देवी सिंह नरवार जैसे विचारशील नेतृत्व का आगे आना बेहद आश्वस्त करता है। उन्होंने हिंदी और सनातन संस्कृति को एक सूत्र में पिरोकर जो दृष्टि रखी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है।
वहीं जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चाहर द्वारा जिला कार्यकारिणी का गठन संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट संकेत है। एक संतुलित, सक्रिय और समर्पित टीम हिंदी आंदोलन को जमीनी स्तर तक ले जाने में सक्षम होगी।
डॉ. भानु प्रताप सिंह के स्पष्ट, निर्भीक और विचारोत्तेजक वक्तव्य ने यह संदेश दे दिया कि हिंदी को तिथि नहीं, निष्ठा चाहिए। यदि ऐसे ही समर्पित लोग हिंदी के लिए आगे आते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब हिंदी अपने वास्तविक सम्मान के शिखर पर होगी।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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