आगरा। उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के संयुक्त अभियान में एटा जिले के जलेसर क्षेत्र के अल्लेपुर गांव में तालाब से एक चार फुट लंबे मगरमच्छ को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को आगरा स्थित चंबल नदी में रिलीज किया गया, जो मगरमच्छों और घड़ियालों के लिए उपयुक्त पर्यावास माना जाता है।
ग्रामीणों ने देखी मौजूदगी, वन विभाग को दी सूचना
घटना उस समय सामने आई जब मगरमच्छ मानव बस्ती में घुस आया और गांव के तालाब में शरण ले ली। तालाब में मगरमच्छ दिखते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग ने तत्काल वाइल्डलाइफ एसओएस की आपातकालीन हेल्पलाइन पर संपर्क कर मदद मांगी।
तालाब का पानी निकाला गया, 5 घंटे चला रेस्क्यू
वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट की तीन सदस्यीय टीम आवश्यक उपकरण और पिंजरे के साथ मौके पर पहुंची। तालाब पानी से भरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में वन विभाग, स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पंप लगाकर तालाब का पानी बाहर निकाला गया। पानी का स्तर कम होने के बाद बचाव दल ने मगरमच्छ को सावधानी से बाहर निकाला और पूरी प्रक्रिया के दौरान उसे कम से कम तनाव देने का ध्यान रखा गया।
स्वास्थ्य जांच के बाद चंबल में छोड़ा
रेस्क्यू के बाद मौके पर ही मगरमच्छ का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में वह स्थिर और स्वस्थ पाया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से आगरा स्थित चंबल नदी में छोड़ दिया गया।
अधिकारियों ने कहा—समय पर सूचना से बची बड़ी अनहोनी
एटा की डीएफओ एवं राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य परियोजना की उप वन संरक्षक चांदनी सिंह (आईएफएस) ने बताया कि स्थानीय निवासियों की समय पर सूचना ने जानवर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के संयुक्त प्रयास से करीब पांच घंटे चला रेस्क्यू अभियान सफल रहा।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि स्थानीय समुदाय, वन विभाग और संस्था के बीच त्वरित समन्वय के कारण मगरमच्छ को सुरक्षित बचाया जा सका।
वहीं वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने बताया कि मगरमच्छों को अक्सर गलत समझा जाता है, जबकि वे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल स्रोतों के आसपास खेतों और गांवों में उनका आ जाना आम बात है, ऐसे में प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमें हमेशा तैयार रहती हैं।
मगरमच्छ अनुसूची-1 में संरक्षित
मगरमच्छ (क्रोकोडायलस पैलस्ट्रिस), जिसे दलदली मगरमच्छ भी कहा जाता है, भारत सहित श्रीलंका, म्यांमार, पाकिस्तान और ईरान के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। यह नदियों, झीलों, तालाबों और अन्य मीठे पानी के जलाशयों में रहता है। इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित किया गया है।
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