आगरा। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत से जुड़े प्रकरण में सोमवार को स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए अनुज कुमार सिंह की अदालत में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई। अदालत ने सभी तर्कों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए 16 दिसंबर 2025 की तिथि नियत की है।
वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने एस.एस. चौहान, राजवीर सिंह और प्रेम कुमार एडवोकेट के साथ अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अवर न्यायालय द्वारा 6 मई 2025 को पुलिस की अधूरी आख्या को नजरअंदाज करते हुए धारा 225(1) बीएनएस की अनदेखी कर आदेश पारित किया गया था, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया। वादी पक्ष का कहना था कि यह आदेश विधि के अनुरूप नहीं था।
वादी अधिवक्ताओं ने बताया कि इसी आदेश को चुनौती देते हुए रिवीजन दायर किया गया था, जिस पर स्पेशल जज एमपी-एमएलए लोकेश कुमार ने 12 नवंबर 2025 को स्पष्ट टिप्पणी करते हुए अवर न्यायालय के 6 मई 2025 के आदेश को निरस्त कर दिया था। रिवीजन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि धारा 225(1) बीएनएस की अनदेखी करते हुए बाद को खारिज किया गया, जो विधिसंगत नहीं है। साथ ही अवर न्यायालय को पुनः सुनवाई कर विधि सम्मत आदेश पारित करने के निर्देश दिए गए थे।
सोमवार को स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने रिवीजन आदेश का अवलोकन करने के बाद यह स्वीकार किया कि पूर्व में प्रक्रिया संबंधी चूक हुई है। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना।
कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सुधा प्रधान तथा स्थानीय अधिवक्ता विवेक शर्मा ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए और रिवीजन आदेश के आलोक में मामले पर अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया।
अदालत ने सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखते हुए 16 दिसंबर 2025 को निर्णय सुनाने की तिथि तय कर दी है। अब इस मामले में अदालत के फैसले को लेकर सभी की निगाहें 16 दिसंबर पर टिकी हुई हैं।
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