अकबर को शाकाहारी बनाने वाले आचार्य हीर विजय सूरीश्वर जी के स्वर्गारोहण दिवस पर भव्य आयोजन

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अकबर को शाकाहारी बनाने वाले आचार्य हीर विजय सूरीश्वर जी के स्वर्गारोहण दिवस पर भव्य आयोजन

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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.

स्थान: जैन मंदिर दादाबाड़ी, आगरा

जब गुरु का स्मरण होता है, तो हृदय में श्रद्धा और चेतना का अद्भुत समन्वय जगमगा उठता है। आचार्य केवल व्यक्ति नहीं होते, वे आत्मा की ज्योति और सत्य के पथप्रदर्शक होते हैं। जगद्गुरु आचार्य श्री हीर विजय सूरीश्वर जी महाराज का जीवन इसी दिव्य आभा का परिचायक था।
उनके स्वर्गारोहण दिवस पर किया गया श्रद्धा-सुमन अर्पण न केवल उनकी स्मृति का सम्मान है, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए आत्मिक प्रेरणा का स्रोत है।

गुरुदेव की स्मृति में भव्य आयोजन

स्वर्गारोहण दिवस पर जैन मंदिर दादाबाड़ी स्थित कमल मंदिर में प्राचीन चरण स्थल पर श्रद्धा से भरपूर आयोजन हुआ।
भक्तों ने गुरुदेव का जाप, आरती और मंगल दीपक प्रज्वलित कर अपनी आस्था अर्पित की।
यह अवसर अध्यात्म और समर्पण का अद्भुत संगम बन गया।

आचार्य का अकबर को दिया प्रबोधन

संघ अध्यक्ष राजकुमार जैन ने कहा कि आचार्य सूरीश्वर जी महाराज ने मुगल सम्राट अकबर को दादाबाड़ी में धर्मोपदेश दिया था।
उनके उपदेशों से प्रभावित होकर अकबर ने शाकाहार अपना लिया
यह प्रसंग भारतीय इतिहास और जैन दर्शन की महानता का जीवंत उदाहरण है।

सत्य और करुणा से समाज का उत्थान संभव

श्री जैन ने बताया कि आचार्य हीर विजय सूरीश्वर जी महाराज का जीवन हमें यह संदेश देता है कि
सत्य और करुणा से ही समाज का उत्थान संभव है।
जिस साधु के उपदेश ने अकबर जैसे सम्राट को शाकाहार और अहिंसा की ओर प्रेरित किया,
उस साधु की स्मृति को संजोना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आत्मा की साधना है।
आज के भौतिकतावादी युग में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और बढ़ जाती है, क्योंकि इन्हीं क्षणों में हम अपने भीतर छिपी दिव्यता से पुनः जुड़ते हैं।
समाज तभी प्रगति करेगा जब उसके आदर्शों का मार्गदर्शन सतत जीवित रहेगा।

श्रद्धालुओं की विशेष उपस्थिति

इस पुण्य अवसर पर जैन मंदिर दादाबाड़ी के ट्रस्टी अजय ललवानी, कोकिला जैन और अशोक सुराना की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
सभी ने मिलकर गुरुदेव की चरण वंदना की और श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।

“आचार्य की वाणी में करुणा, मार्ग में सत्य, और जीवन में अहिंसा — यही सच्ची श्रद्धांजलि है।”

Dr. Bhanu Pratap Singh