असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर NRC अद्यतन प्राधिकरण ने शुक्रवार को असम सीआईडी में एक FIR दर्ज की है। इसमें एनआरसी के पूर्व राज्य समन्वयक IAS प्रतीक हजेला का नाम है। हजेला पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकों के रूप में अपात्र व्यक्तियों के नामों को दस्तावेजों में शामिल किया। उनके ऊपर ‘राष्ट्र-विरोधी अधिनियम’ के तहक केस दर्ज किया गया है। प्रतीक हजेला के अलावा FIR में और कर्मचारियों के भी नाम हैं।
आईएएस अधिकारी प्रतीक हजेला ने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में विवादास्पद दस्तावेज के अद्यतन और प्रकाशन का नेतृत्व किया था। एनआरसी अधिकारियों ने उन पर जालसाजी, धोखाधड़ी, गलत रिकॉर्ड बनाने, शपथ पर गलत बयान देने और अन्य आरोपों के साथ आपराधिक साजिश का आरोप लगाया। भारत के रजिस्ट्रार जनरल और असम कार्यालय के तत्वावधान में एनआरसी प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। इसमें प्रकाशित एनआरसी के व्यापक समयबद्ध फिर से सत्यापन की मांग की गई है।
बीजेपी की मांग
भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार भी चाहती है कि बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में डेटा का 20% और आंतरिक जिलों में डेटा का 10% फिर से सत्यापन हो। हजेला के तहत 1951 के एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया 2015 में शुरू की गई थी। अंतिम सूची अगस्त 2019 में प्रकाशित हुई थी, जिसमें 31121004 लोगों के नाम और 1906657 लोगों के नाम छूट गए थे।
अलग सॉफ्टवेयर यूज करने का आरोप
प्रतीक हजेला के खिलाफ यह एफआईआर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के वर्तमान राज्य समन्वयक हितेश देव सरमा ने दर्ज कराई है।
यह आरोप लगाता है कि एक आईएएस अधिकारी हजेला ने जानबूझकर अनिवार्य गुणवत्ता जांच से बचने के लिए एक सॉफ्टवेयर का उपयोग करने का आदेश दिया, जो गुणवत्ता जांच को रोकता है। इससे अपात्र व्यक्तियों के नामों को एनआरसी में प्रवेश की सुविधा मिली। यह राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाला कृत्य है। एफआईआर में कुछ अन्य अधिकारियों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों का भी नाम लिया गया है।
समझें क्या है पूरा विवाद
– नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को अपडेट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली कवायद का उद्देश्य अवैध अप्रवासियों को बाहर निकालना था।
– 31 अगस्त, 2019 को जारी अंतिम एनआरसी सूची में 3.3 करोड़ आवेदकों में से 1.9 मिलियन को बाहर कर दिया गया।
– असम सरकार और अन्य संगठनों ने डेटा में गड़बड़ी का आरोप लगाकर इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
– विवाद के बीच तत्कालीन एनआरसी प्रमुख हजेला ने 2019 में शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने उन्हें तीन साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।
-एजेंसियां
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