आगरा: किसानों की स्थिति बताने वाली भाजपा सरकार में अपनी जमीन वापसी के लिए किसानों को खून तक बहाना पड़ रहा है। एडीए अधिकारी उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं करना चाहते। इसीलिए अब आर-पार की लड़ाई के लिए खून से पत्र लिखा जा रहा है। यह पत्र भी सीएम योगी को लिखा गया है और मांग की गई है कि उनकी अधिग्रहण की गई जमीन को वापस कर दिया जाए। क्योंकि एडीए उनको मुआवजा देना नहीं चाहता, उनके साथ वार्ता नहीं करना चाहता। विभाग तानाशाही पर उतर आया है। जब वह तानाशाही पर है तो किसान भी आप अपना खून बहाने को पीछे नहीं हटेंगे।
आपको बताते चलें कि पूरा मामला इंनरिंग रोड से जुड़ा हुआ है। इनर रिंग रोड के लिए एडीए की ओर से किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई थी। इस मामले को भी 14 साल बीत गए लेकिन अधिग्रहण की गई भूमि का किसानों को मुआवजा नहीं मिला और ना ही उनकी जमीन वापस हुई। इसी बात को लेकर किसान विगत कई वर्षों से आंदोलित हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब किसानों ने भी आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है और अपनी मांगों से प्रदेश मुखिया को रूबरू कराने के लिए अपने खून से पत्र भी लिखा है। किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर सरकार और एडीए किसानों का खून बहाना चाहता है तो उन्हें यह भी मंजूर है लेकिन अपनी जमीन को नहीं छोड़ेंगे।
14 साल पुराना है मामला
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने बताया कि पूरा मामला 14 साल पुराना है। लगभग 14 साल पहले एडीए की ओर से इनर रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की गई थी। भूमि अधिग्रहण के दौरान तय हुआ था कि सरकार किसानों को उनकी भूमि का उचित मुआवजा देगी लेकिन साल दर साल बीते चले गए। ना तो ए डीएनए उनकी सुनवाई की और ना ही सरकार की कानों तक जू रेंगी। सरकार के नियम के अनुसार अधिक समय बीत जाने के बाद अधिग्रहण की गई भूमि को किसानों को वापस किया जाना होता है लेकिन एडीए की तानाशाही तो देखिए अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा नहीं मिला। अब समय अधिक होने पर किसानों की जमीन भी वापस नहीं कर रहा।
किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा रहे हैं लेकिन उनकी सरकार के कुछ अधिकारी उनकी मंशा को चूना लगाने में लगे हुए हैं। ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। किसान नेता श्याम सिंह ने कहा कि सीएम को जो खून से पत्र लिखा गया है उसमें लिखा है कि ‘अधिग्रहण की गई भूमि किसानों को वापस की जाए, अगर ऐसा नहीं होता तो एडीए के सभी अधिकारियों की 6 माह तक सैलरी रोक दी जाए। सरकारी सुविधाएं जो उन्हें मिल रही है उन पर भी पाबंदी लगा दी जाए जिससे उन्हें भी पता चले कि काम और पैसा न मिलने पर दर्द क्या होता है।’
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