भोजपुरी-कजरी की सुरमयी शाम में संयुक्त निदेशक अभियोजन राजेश कुमार यादव को भावभीनी विदाई, घनश्याम गुप्ता ने संभाला प्रभारी पदभार
सेवानिवृत्ति का गरिमामय अवसर
आगरा। संयुक्त निदेशक अभियोजन राजेश कुमार यादव के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर अभियोजन जगत ने एक भावुक एवं स्मरणीय विदाई समारोह का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। उनके स्थान पर घनश्याम गुप्ता को प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन का दायित्व सौंपा गया।
अभियोजन परिवार का आत्मीय समागम
श्री यादव के सम्मान में अभियोजन संवर्ग एवं डीजीसी संवर्ग द्वारा होटल पी.एल. पैलेस, संजय प्लेस में एक भव्य फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं ने उनके साथ बिताए गए कार्यकाल के अनुभव साझा किए और उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

सुर और संस्कारों की अविस्मरणीय प्रस्तुति
समारोह के दौरान श्री राजेश कुमार यादव ने कजरी गीत प्रस्तुत कर समूचे वातावरण को भावविभोर कर दिया। वहीं डीजीसी राजस्व अशोक चौबे, एडवोकेट ने अपनी सशक्त भोजपुरी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुरों और संवेदनाओं से सजी यह संध्या लंबे समय तक स्मृतियों में जीवित रहेगी।
संचालन, स्वागत और सहभागिता
कार्यक्रम का कुशल एवं संयमित संचालन पूर्व डीजीसी श्री बसंत गुप्ता द्वारा किया गया। अतिथियों का औपचारिक स्वागत पी.ओ. श्री बृजमोहन कुशवाहा ने किया। समारोह में अभियोजन की एकजुटता और पारिवारिक भाव स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हुआ।
विशिष्ट उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा
इस अवसर पर प्रमुख रूप से अपर निदेशक अभियोजन श्री दिलीप कुमार श्रीवास्तव, डीजीसी सिविल श्री धर्मेंद्र कुमार वर्मा, डीजीसी क्राइम श्री राधाकांत गुप्ता, एस.पी.ओ. श्री मृतुंजय कुमार, एडवोकेट रवि चौबे सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।
संपादकीय : न्याय का मजबूत स्तंभ है अभियोजन
अभियोजन व्यवस्था किसी भी न्यायिक प्रणाली की रीढ़ होती है। न्यायालय तक सत्य को निर्भीक, तथ्यपरक और विधिसम्मत रूप में पहुँचाने का उत्तरदायित्व अभियोजन पर ही निहित होता है। सक्षम, ईमानदार और अनुभवी अभियोजन अधिकारी न केवल अपराधियों को दंड दिलाने में सहायक होते हैं, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी सुदृढ़ करते हैं।
राजेश कुमार यादव जैसे अधिकारियों का दीर्घ अनुभव अभियोजन सेवा को समृद्ध करता है, वहीं घनश्याम गुप्ता जैसे नए प्रभारी अधिकारियों से यह अपेक्षा है कि वे इस परंपरा को और अधिक सशक्त बनाएँगे। मजबूत अभियोजन ही सशक्त न्याय की आधारशिला है—और यही लोकतंत्र की असली ताकत।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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