आगरा: शहर को ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने का सपना लेकर शुरू की गई ‘सीएम ग्रिड योजना’ का हश्र पहली ही बारिश में बेहद निराशाजनक रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़कें सोमवार रात हुई बारिश की मार नहीं झेल सकीं और ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। बसई मंडी से अमर होटल तक के निर्माणाधीन मार्ग पर तीन से चार फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिससे पूरा इलाका किसी दलदल में तब्दील हो गया है।
गड्ढों में समाईं गाड़ियां, बाल-बाल बचीं जान
सड़कों पर जलभराव के चलते गड्ढों का पता न चल पाने के कारण करीब 12 कारें और वैन इन गड्ढों में फंसकर पलट गईं। वैगन-आर कार पलटने से उसमें सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय लोगों ने मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। स्थिति इतनी भयावह थी कि टोरंट पावर की मरम्मत वैन और नगर निगम की कचरा गाड़ियां भी इस दलदल में फंस गईं, जिन्हें निकालने के लिए शाम तक हाइड्रा मशीनों का सहारा लेना पड़ा।
90 करोड़ का बजट, 90 दिन में धुआं
इस बदइंतजामी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बसई मंडी से अमर होटल तक की इस सड़क के लिए करीब 90.21 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया था। मात्र 90 दिन पहले शुरू हुए इस काम की हकीकत यह है कि जमीन के नीचे 10 फीट गहरे सीवर और पानी की लाइनें दबाने के बाद ऊपर सिर्फ मिट्टी और गिट्टी डाल दी गई, जो पहली ही बारिश में धंस गई। इस लापरवाही ने क्षेत्र के लगभग ढाई लाख निवासियों का जीवन नरकीय बना दिया है।
नमामि गंगे और आवास विकास में भी हाहाकार
सीएम ग्रिड ही नहीं, बल्कि ‘नमामि गंगे योजना’ के तहत पुरानी मंडी से शाहजहां पार्क के बीच बिछाई गई सीवर लाइन वाला हिस्सा भी पूरी तरह ध्वस्त हो गया, जहाँ सड़क पर 15 फीट चौड़े और 8 फीट गहरे खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। वहीं, आवास विकास सेक्टर-4 में भी सीवर लीकेज के कारण पानी की मुख्य पाइपलाइन फट गई, जिससे पूरा इलाका जल संकट से जूझ रहा है।
अधिकारियों की सफाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य और चीफ इंजीनियर अरविंद श्रीवास्तव ने मौके का मुआयना किया। अधिकारियों ने बारिश को वजह बताते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने ठेकेदारों को युद्धस्तर पर मरम्मत कराने और गड्ढों को तत्काल भरकर यातायात बहाल करने के सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, करोड़ों की बर्बादी के बाद अब यह देखना बाकी है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों पर क्या ठोस कार्रवाई होती है।
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