कोरोना काल के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कानून आवश्यक
Aligarh (Uttar Pradesh, India)। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की लॉ सोसाइटी विधि संकाय द्वारा “कोविड-19 के दौरान अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विधि एक विश्लेषण” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय आभासी सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने शिरकत की।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि कोविड-19 ने एक अंतर्राष्ट्रीय संकट उत्पन्न कर दिया है। विश्व के लगभग सभी देश इससे पीड़ित हैं। परन्तु विकासशील देश इससे अधिक प्रभावित हुए है। क्योंकि उनके पास स्वास्थ सेवायें एवं उपकरण आवश्यक मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विधि की इस समय अत्यन्त आवश्यकता है, जो कि सभी देशों पर समान रूप से लागू है। उन्होंने कहा कि ऐसा कानूनी ढ़ांचा बनाया जाए जिससे स्वास्थ्य आपातकाल के समय में दवाइयों तथा टीकों की शीघ्र जांच और अनुमोदन हो सके।
समय की जरूरत है कानून
मुख्य अतिथि डॉ. जूली लार्ड, कंसल्टेंट पीडियाट्रीशीयन क्वीन एलिज़ाबेथ हास्पीटल, लंदन ने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप से पूरा विश्व पीड़ित है। स्टाफ की कमी, पी०पी०ई० की कमी तथा उपकरणों की कमी आदि कुछ समस्यायें हैं जिन पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन के द्वारा बताया कि लंदन में त्वरित हस्तक्षेप के कारण कोरोना वायरस को समय रहते नियंत्रित किया गया है। विश्व को इससे प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह वायरस प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। जो बच्चों को विशेष रूप से प्रभावित करते है। अतः ऐसे कानून की इस समय बहुत जरूरत है जो दुनिया में आपातकालीन स्वास्थ के समय आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति में सहायक हो।
केन्द्र और राज्यों में समन्वय का अभाव
सम्मेलन के डायरेक्टर एवं विधि संकाय के डीन प्रोफेसर शकील अहमद समदानी ने भारतीय कानून में स्वास्थ सेवाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वास्थ का अधिकार भारत में अनुच्छेद-21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायलय ने इसे अपने अनेक ऐतिहासिक निर्णयों में प्राण एवं दैहिक स्वतन्त्रा के अधिकार के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित किया है। इसके अलावा राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत भी स्वास्थ के अधिकार को महत्ता प्रदान करते है। प्रोफेसर समदानी ने आगे बताया कि देश में कम से कम 30-35 ऐसे कानून हैं जिनमें स्वास्थ्य का ज़िक्र मिलता है। परंतु इतनी कानूनी सुरक्षा होने के बावजूद हमारे देश में स्वास्थ्य की स्थिति संतोषजनक न होने का कारण संघ तथा राज्य सरकारों के मध्य सामन्जस्य की कमी है। केन्द्र व राज्यों सरकारों का संयुक्त प्रयास कोविड-19 महामारी से प्रभावी रूप से लड़ने में सहायक हो सकता है।
क्वारंटाइन कोई नई बात नहीं
सम्मेलन में बीजक भाषण प्रस्तुत करते हुए डॉ. अरूज कय्यूम सीनियर कंसल्टेंट एवं सीनियर लेक्चरर किग्ंस कॉलेज लंदन ने कहा कि कोरोना विश्व के लगभग सभी देशों को प्रभावित कर रहा है। स्वास्थ का अधिकार एक बुनियादी मानवीय अधिकार है। इस संकट के समय में इस मानवीय अधिकार के प्रवर्तन के लिए विधि एवं विधायिका दोनों के एक साथ आने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पैगम्बर हज़रत साहब ने क्वारनटाइन की संकल्पना आज से 1400 वर्ष पहले ही दे दी थी। 14 वीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में 40 दिनों का क्वारनटाइन देश से बाहर आने वाले समुद्री जहाज़ के लोगों के लिए अनिवार्य किया गया था। यह कोई नया विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम में कोरोना वायरस अधिनियम 2020 पारित किया गया है। इसमें कोरोना वायरस की जांच तथा इलाज प्रत्येक व्यक्ति के लिए निशुल्कः उपलब्ध है। विश्व के अन्य देशों की भी इस प्रकार के स्वास्थ कानून को पारित करना चाहिए ताकि ग़रीब तथा वंचित लोग इस महामारी से लड़ सकें।
जापान एवं नार्थ कोरिया ने जल्दी काबू पाया
मानद अतिथि डॉ. एआर मुदम्बेल सीनियर कंसल्टेंट दोहा, कतर ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि 30 जनवरी 2020 को जब कोरोना वायरस को विश्व स्वास्थ संगठन ने महामारी घोषित किया तो दुनिया को एक सख्त अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ कानून की आवश्यकता का आभास हुआ। उन्होंने बताया कि जिन-जिन देशों में सरकार ने त्वरित हस्तक्षेप किया वहां इस महामारी पर जल्दी काबू पाया जा सका जैसे जापान एवं नार्थ कोरिया। उन्होंने सरकारों द्वारा अपने देशों में इस महामारी से निपटने के प्रयासों का अपने संबोधन में विस्तार से वर्णन किया।
12 से अधिक देशों ने भाग लिया
मेहमानों का सवागत प्रोफेसर ज़हीरूद्दीन तथा धन्यवाद प्रोफेसर वसीम अली ने किया। मोहम्मद नासिर असिस्टेंट प्रोफेसर, अमुवि ने प्रश्नोत्तरी सत्र को संचालित किया। डॉ. गौरव वाष्र्णेय तथा अब्दुल्ला समदानी, सेक्रेट्री लॉ सोसायटी ने मेहमानों का परिचय कराया। आयशा नासिर अल्वी तथा लायबा फातिमा मेम्बर लॉ सोसायटी ने प्रोग्राम का सफल संचालन किया। इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में तकरीबन 1400 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया और 12 से अधिक देश के लोगों ने हिस्सा लिया। रिपोरटियर फौज़िया एवं शेल्जा सिंह रिसर्च स्कालर रहीं।
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