मथुरा की चित्रगुप्त पीठ में हवन-पूजन के साथ कारसेवा का शंखनाद, राधाकुंड में संतों की अहम बैठक शुरू, भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

REGIONAL

मथुरा: उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक स्थल मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जुल्हेंदी स्थित ‘चित्रगुप्त पीठ’ में रविवार को विधि-विधान के साथ विशेष हवन-पूजन का कार्यक्रम शुरू हो चुका है। इस धार्मिक अनुष्ठान और हवन-पूजन के तुरंत बाद देश भर से पधारे प्रमुख साधु-संतों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के तहत कारसेवा का औपचारिक शंखनाद किया जाएगा।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर है। एहतियात के तौर पर चित्रगुप्त पीठ और उसके आसपास के पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

​भरतपुर से मंगाए गए हैं अयोध्या जैसे गुलाबी पत्थर

उल्लेखनीय है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के भव्य मंदिर के निर्माण के पावन इरादे से राजस्थान के प्रसिद्ध भरतपुर जिले स्थित बंसीपहाड़पुर से लाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार की देर रात सुरक्षित रूप से मथुरा पहुंच गई थी। खास बात यह है कि इन्हीं विशेष पत्थरों का उपयोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण में भी किया गया है।

चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की पहल पर यह पत्थर मंगवाए गए हैं। उन्होंने पहले ही यह घोषणा की थी कि आज यानी 9 अगस्त को आश्रम से विधिवत रूप से कारसेवा का ऐलान किया जाएगा। इसके लिए एक भव्य और विस्तृत कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसमें देश के सभी 13 अखाड़ों के वरिष्ठ साधु-संतों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

स्वामी सच्चिदानंद का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण का यह भव्य मंदिर उनकी अपनी जन्मस्थली पर ही पुनर्निर्मित किया जाएगा। इसी बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कुल पांच हजार मीट्रिक टन गुलाबी पत्थरों का बड़ा ऑर्डर दिया गया है।

याद दिला दें कि स्वामी सच्चिदानंद ने बीते 4 जुलाई को ऐतिहासिक अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा करने का खुला एलान किया था। इसी सिलसिले में उन्होंने गत 12 जुलाई को हरिद्वार स्थित ‘वात्सल्य गंगा आश्रम’ में जाकर प्रख्यात साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात की थी और इस आंदोलन के लिए उनका खुला समर्थन भी हासिल किया था।

कारसेवा के ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन का कड़ा रुख

इस संभावित कारसेवा और शंखनाद के ऐलान के बाद से ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। स्वामी सच्चिदानंद ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि कारसेवा की घोषणा के बाद से स्थानीय पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर आ गया है और एहतियात के तौर पर कई प्रमुख साधु-संतों को ‘रेड कार्ड नोटिस’ थमाए गए हैं।

प्रशासन द्वारा जिन 12 प्रमुख साधु-संतों और धर्माचार्यों को यह नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से साध्वी ऋतंभरा, प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, महंत फूलडोल बिहारीदास महाराज, श्रीचरणदास महाराज, सौरभ गौड़, सीतारामदास महाराज, संत अभिषेक ब्रह्मचारी, मोहिनी बिहारी शरण महाराज और महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज शामिल हैं।

पुलिस की ओर से जारी इन नोटिसों में यह कड़े निर्देश दिए गए हैं कि धार्मिक भावनाओं की आड़ में समाज को उत्तेजित करने वाले कोई भी वीडियो, संदेश या कारसेवा से जुड़े पोस्टर सोशल मीडिया पर ट्वीट या प्रसारित न किए जाएं। इसके साथ ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी किसी भी गतिविधि से पूरी तरह बचने को कहा गया है, जिससे शहर का सांप्रदायिक सौहार्द और शांति व्यवस्था खतरे में पड़े।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बावजूद किसी भी प्रकार की विघटनकारी गतिविधियां उत्पन्न की गईं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

​फिलहाल रोकी गई पत्थरों की दूसरी खेप, शिला पूजन पर जोर

मौजूदा प्रशासनिक दबाव और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्वामी सच्चिदानंद ने यह जानकारी दी है कि फिलहाल गुलाबी पत्थरों की दूसरी खेप के आने के सिलसिले को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। आज रविवार को आयोजित की जा रही इस कार्यशाला और बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु पारंपरिक शिला पूजन और कारसेवा के शंखनाद पर ही केंद्रित है।

शंखनाद संपन्न होने के बाद सभी संत-महात्मा मिलकर गहन मंथन करेंगे और उसके बाद ही इस आंदोलन की आगे की दिशा और रणनीति तय की जाएगी।

Dr. Bhanu Pratap Singh