संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। सीजेएम का सुल्तानपुर स्थानांतरण किए जाने के बाद बुधवार को वकीलों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और इस फैसले पर सवाल खड़े किए।
अधिवक्ताओं का कहना है कि सीजेएम विभांशु सुधीर ने अपने कार्यकाल में न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और सक्रियता दिखाई और कई मामलों में अहम फैसले लेकर न्याय प्रक्रिया को गति दी। ऐसे में बेहतर काम करने वाले अधिकारी का अचानक तबादला न्याय व्यवस्था के लिए सही संदेश नहीं देता।
जिला न्यायालय में प्रदर्शन, तबादले पर उठाए सवाल
बुधवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता जिला न्यायालय परिसर में एकत्र हुए और तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया।अधिवक्ताओं ने कहा कि सीजेएम विभांशु सुधीर का कार्यकाल मात्र तीन माह का रहा, लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने न्यायिक कार्यों में प्रभावी भूमिका निभाई।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने मीडिया कवरेज को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि तबादले से जुड़े तथ्यों को सही तरीके से सामने लाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।
हाईकोर्ट ने किया फेरबदल, नए सीजेएम की तैनाती
जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के तहत सीजेएम विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर स्थानांतरित किया गया है। उनके स्थान पर सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) आदित्य सिंह को चंदौसी का नया सीजेएम नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा सीतापुर के सीजेएम राजेंद्र कुमार सिंह को इसी पद से कन्नौज स्थानांतरित किया गया है। इस फेरबदल में इसी स्तर के आठ अन्य न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया गया है।
हिंसा मामले में पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश बना वजह?
गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले ही संभल में शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर सीजेएम विभांशु सुधीर ने बड़ा आदेश दिया था।
अदालत ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) रहे और वर्तमान में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश गोली लगने से घायल खग्गू सराय निवासी युवक के पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया गया था।
अब सीजेएम के तबादले के बाद वकीलों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह स्थानांतरण उसी आदेश से जुड़ा हुआ है। हालांकि प्रशासन या हाईकोर्ट स्तर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
अधिवक्ताओं ने जताई नाराजगी, पुनर्विचार की मांग
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक अधिकारियों का तबादला सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन किसी महत्वपूर्ण आदेश के तुरंत बाद तबादला होने से कई सवाल खड़े होते हैं। वकीलों ने मांग की कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
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