Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। धार्मिक स्थलों के आस पास व मुख्य सड़कों पर भीख मंगवाने के लिए बच्चों को अपाहिज कर देने, अंधा कर देने जैसी दुखद घटनाएं सुनने व देखने को मिलती ही रहती हैं। मगर अब ऐसा मामला सामने आया है कि आप जान कर रह जायेंगे दंग, जिसमें एक हाथी को भीख मंगवाने के लिए अंधा कर दिया गया। मथुरा के चुरमुरा में स्थित देश के एकमात्र हाथी चिकित्सालय में 55 वर्षीय हाथी आर्य का इलाज किया जा रहा है। आर्य की दास्तां बेहद भावुक कर देने वाली है। आर्य की आंखें इस लिए फोड़ दी गईं कि उससे भीख मंगवाई जा सके। यहां चिकित्सकों ने उम्मीद जताई है कि आर्य की आंखें फिर से ठीक हो सकेंगी।
पशु चिकित्सक जानकर है हैरान कि उसकी बायीं आंख में किसी नुकीली चीज से चोट पहुंचाई गई है
फरह स्थित चुरमुरा हाथी संरक्षण केंद्र में शुक्रवार को एक और हाथी लाया गया। 55 वर्षीय हाथी का नाम आर्य है। इसका इस्तेमाल भीख मांगने के लिए किया जा रहा था। इसकी आंख में नुकीली चीज से चोट पहुंचाई गई। देश के एकमात्र हाथी अस्पताल में 55 वर्षीय हाथी आर्य का उपचार किया जाएगा। विगत दिनों वन विभाग की टीम द्वारा उसे यहां लाया गया है। आंखों में चोट की वजह से उसे दिखाई नहीं दे रहा, साथ ही वह गंभीर गठिया रोग से भी पीड़ित है। उसे लेजर थेरेपी, हाइड्रोथेरेपी आदि दी जा रही है, फरह अस्पताल लाया गया हाथी आर्य कालानुक्रमिक दृष्टि से नेत्रहीन है। चेकअप के दौरान पशु चिकित्सक यह जानकर हैरान रह गए कि उसकी बायीं आंख में किसी नुकीली चीज से चोट पहुंचाई गई है। आर्य गंभीर रूप से कुपोषित और अन्य कई समस्याओं से पीड़ित है। अगले कुछ दिन उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हाथी की चिकित्सा कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि हमारी टीम उसके स्वास्थ्य की प्रगति पर नजर रखे हुए है। एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हाथी अस्पताल आशा का प्रतीक बन गया है। कई मालिक अपने बीमार हाथियों को भी अस्पताल लाने की अनुमति के लिए वन विभाग से संपर्क कर रहे हैं। संस्था की सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि नेत्रहीन हाथी आर्य को आखिरकार उपचार का ठिकाना मिल गया। उम्मीद है, उसकी आंखें ठीक हो सकेंगी।
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