जोधपुर। दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से बुधवार को एक बड़ी कानूनी अपडेट मिली है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें कुछ गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में उनकी उम्रकैद की सजा यथावत रखी गई है।
अदालत का फैसला और राहत
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए आसाराम को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(डी) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 5(जी)/6 के तहत गैंगरेप तथा सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। इसके अलावा, अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश से संबंधित आईपीसी की धारा 120(बी) के आरोपों से भी बरी कर दिया है। हालांकि, इन राहतों के बावजूद नाबालिग से रेप के मुख्य मामले में उनकी सजा बरकरार रहेगी और वे आजीवन कारावास काटना जारी रखेंगे। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में आसाराम अस्थायी जमानत पर बाहर हैं, जिसकी अवधि सोमवार को सात दिनों के लिए बढ़ाई गई थी।
आसाराम का अब तक का सफर: एक संक्षिप्त परिचय
असुमल हरपलानी के नाम से जन्में आसाराम का जन्म अप्रैल 1941 में तत्कालीन अविभाजित भारत के सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) प्रांत के बेरानी गांव में हुआ था। विभाजन के बाद 1947 में उनका परिवार भारत के अहमदाबाद में आकर बस गया। साठ के दशक में लीलाशाह को अपना आध्यात्मिक गुरु बनाने के बाद उनका नाम बदलकर आसाराम रखा गया।
1972 में साबरमती नदी के किनारे मुटेरा में अपनी पहली कुटिया स्थापित करने के बाद, आसाराम का प्रभाव तेजी से बढ़ा। उनके आध्यात्मिक संस्थान का विस्तार गुजरात से शुरू होकर देखते ही देखते देश के विभिन्न राज्यों तक फैल गया, जिससे वे एक प्रभावशाली स्वयंभू संत के रूप में स्थापित हुए। कानूनी शिकंजे में आने से पहले तक उनके अनुयायियों की संख्या लाखों में थी।
- प्रेमानंद महाराज पर बढ़ते विवादों के बीच पं. प्रमोद गौतम का बड़ा ज्योतिषीय विश्लेषण - October 8, 2026
- आगरा में प्रेम प्रसंग के चलते युवक ने पहले युवती को मारी गोली, फिर खुद को भी उड़ाया - October 7, 2026
- आगरा जनकपुरी महोत्सव: मिथिला की तर्ज पर सजा विवाह स्थल; राजा-रानी के स्वरूपों ने निभाई कन्यादान की रस्म, गूंजे ‘जय श्रीराम’ और ‘जय तुलसी माता’ के जयकारे - October 7, 2026