बहराइच बुक स्कैम: बच्चों का भविष्य रद्दी के भाव! ₹4 किलो बिकीं 13 हजार सर्व शिक्षा अभियान की किताबें, 4 गिरफ्तार, 5 पर गिरी गाज

REGIONAL

बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में बच्चों के हक पर डाका डालने वाले एक बड़े ‘शिक्षा माफिया’ रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत मुफ्त बंटने वाली किताबों को कबाड़ में बेचने के मामले में जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने कड़ा रुख अपनाते हुए आठ दोषियों पर बड़ी कार्रवाई की है। इस घोटाले में जहाँ कर्मचारियों को बर्खास्त और निलंबित किया गया है, वहीं पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

स्टॉक से हजारों किताबें गायब, कबाड़ के जरिए बाहर भेजी जा रही थीं

मामला उस वक्त सामने आया जब सोशल मीडिया पर किताबों को कबाड़ में बेचे जाने का वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। जांच में पाया गया कि स्टॉक रजिस्टर से 10 हजार से ज्यादा किताबें कम थीं।

कबाड़ी की दुकान से बरामद ट्रक में लदी किताबें बहराइच की ही निकलीं और जानकारी मिली कि इन्हें उत्तराखंड भेजने की तैयारी थी। शुरुआती स्तर पर विभाग की ओर से स्टॉक पूरा होने का दावा किया गया, लेकिन जांच रिपोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया।

दफ्तर के भीतर से ही रची गई साजिश

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बीएसए कार्यालय का ही कर्मचारी था। थाना रामगांव पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें बीएसए दफ्तर का अनुचर आलोक मिश्रा भी शामिल है। उसके साथ दिलशाद अली, शुभांकर और अर्जुन को भी पकड़ा गया है।

पुलिस के अनुसार कुल 13,082 सरकारी किताबें बरामद की गई हैं। आरोपियों पर सार्वजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पूछताछ में सामने आया कि लालच में आकर किताबों का गबन किया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने किताबों की बिक्री का वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आरोपियों से उगाही की कोशिश की थी। इस एंगल पर भी पुलिस काम कर रही है। एक आरोपी समीर अहमद अब भी फरार है।

प्रशासन की सख्ती: निलंबन, बर्खास्तगी और नोटिस

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने विभागीय कार्रवाई की है। दो अनुचरों को निलंबित किया गया है, जबकि तीन कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की संस्तुति शासन को भेजी गई है।

इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल है और कई स्तरों पर जवाबदेही तय की जा रही है।

बीएसए की भूमिका पर भी सवाल

कार्रवाई की जद में आए कुछ अधिकारियों ने खुद बेसिक शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस उत्तरदायी कमेटी का हवाला देकर कार्रवाई की गई, वह वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थी और उसे बैक डेट में दर्शाया गया।

इन अधिकारियों का दावा है कि उन्हें कमेटी का सदस्य होने की जानकारी तक नहीं थी। अब इस आरोप के बाद खुद बीएसए की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।

मीडिया से दूरी, जवाबों का इंतजार

मामले के तूल पकड़ने के बाद जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। फोन पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिन किताबों पर बच्चों का हक था, वे चार रुपये किलो के भाव कबाड़ में कैसे पहुंच गईं। यह सिर्फ गबन का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में निगरानी और नैतिक जिम्मेदारी की परीक्षा भी है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और प्रशासन आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जिम्मेदारी केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित रहती है या जवाबदेही की जद और ऊपर तक जाती है।

Dr. Bhanu Pratap Singh