आगरा: ताजनगरी के बहुचर्चित अवैध असलाह लाइसेंस प्रकरण में नामजद आरोपियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल मोहम्मद जैद और अरशद की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत (अरेस्ट स्टे) खत्म होने के बाद आरोपियों के लिए यह बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
STF ने कोर्ट में रखा मजबूत पक्ष
सुनवाई के दौरान एसटीएफ (STF) के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर यतीन्द्र शर्मा ने अदालत के सामने पुख्ता साक्ष्य पेश किए। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध का है जिसमें मिलीभगत कर अवैध तरीके से हथियारों के लाइसेंस जारी किए गए। कोर्ट ने माना कि आरोपियों को बाहर रहने देना जांच और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट से खत्म हो चुका है ‘कवच’
बता दें कि दिसंबर माह में आरोपियों को देश की सर्वोच्च अदालत से गिरफ्तारी पर जो रोक मिली थी, उसकी अवधि समाप्त हो गई है। इसके बाद आरोपियों ने निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
सात रसूखदारों पर दर्ज है FIR
एसटीएफ ने इस घोटाले में थाना नाई की मंडी में कुल सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इस सूची में शोभित, संजय कपूर (असलाह बाबू), मोहम्मद जैद, अरशद, भूपेंद्र सारस्वत, शिव सारस्वत, राजेश बघेल शामिल हैं
अगली कार्रवाई की तैयारी:
सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस अब अन्य नामजद आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। जांच एजेंसियां इस मामले में हुए आर्थिक लेनदेन और प्रशासनिक चूक की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
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