आगरा के श्री प्रेमनिधि जी मंदिर में धूमधाम से मनाया गया पवित्रा एकादशी उत्सव, ठाकुर श्याम बिहारी जी का हुआ मनोहारी श्रृंगार

RELIGION/ CULTURE





आगरा। पुष्टिमार्ग में श्रावण शुक्ल एकादशी, जिसे पवित्रा एकादशी अथवा पवित्रारोपण उत्सव कहा जाता है, का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसी अवसर पर नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि जी मंदिर में ठाकुर श्याम बिहारी जी का पवित्रा एकादशी उत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। ठाकुरजी का आकर्षक हिंडोला सजाया गया और कसीदा साज के साथ श्वेत एवं सुनहरी किनारीयुक्त वस्त्र धारण कराए गए। विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी एवं सुनीत गोस्वामी ने बताया कि पवित्रा एकादशी पर पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार ठाकुरजी को सूत अथवा रेशम से निर्मित विशेष पवित्रा अर्पित किया जाता है। यह पवित्र धागा प्रभु की सेवा-पूजा में अनजाने में हुई भूल-चूक एवं त्रुटियों के प्रायश्चित और प्रभु से क्षमा याचना का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने बताया कि शुभ समय होने पर श्रृंगार के दौरान ही ठाकुरजी को पवित्रा कंठ में धारण कराया जाता है, जबकि समय अनुकूल न होने पर संध्या समय उत्थापन के पश्चात शंख एवं झांझ की मंगल ध्वनि के बीच पवित्रा धारण कराया जाता है। इसी परंपरा के अनुसार मंदिर में ठाकुर श्याम बिहारी जी को पवित्रा अर्पित कर विशेष सेवा की गई।

पवित्रा एकादशी के अवसर पर ठाकुरजी को मिश्री, शक्करपारा, मनोहर एवं बर्फी का विशेष भोग अरोगाया गया। भक्तों ने भक्ति भाव से ठाकुरजी के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।

मुख्य सेवायतों ने बताया कि पवित्रा एकादशी के अगले दिन द्वादशी को पवित्रा बारस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन वैष्णवजन अपने गुरुदेव अथवा श्री महाप्रभुजी के स्वरूप को पवित्रा भेंट कर दंडवत करते हैं। इस प्रकार पवित्रा एकादशी केवल उत्सव नहीं, बल्कि पुष्टिमार्गीय सेवा परंपरा में समर्पण, शुद्धि, क्षमा और गुरु-भक्ति का विशेष पर्व है।




Dr. Bhanu Pratap Singh