पुण्यतिथि पर साहित्यिक गोष्ठी में गूंजे अटल जी के विचार, गीत और संस्मरण; नम हुईं आंखें

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अटल गीत गंगा ने श्रद्धेय अटल जी को किया याद

पुण्यतिथि पर साहित्यिक गोष्ठी में गूंजे अटल जी के विचार, गीत और संस्मरण; नम हुईं आंखें

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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.

आगरा। “अटल देह तजकर कहाँ चल दिए, अटल गीत गंगा ये बहती रहेगी…” इन भावपूर्ण पंक्तियों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। रविवार को ‘अटल गीत गंगा परिवार’ द्वारा निखिल बुक कैफे में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं और कवियों ने अटल जी के व्यक्तित्व, कृतित्व, साहित्यिक योगदान और राष्ट्रसेवा से जुड़े संस्मरण साझा किए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. निर्मला दीक्षित ने कहा कि अटल जी के परिवार का सदस्य होना उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य रहा। उन्होंने बताया कि अटल जी ने सदैव न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी और सिखाया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।

केंद्रीय हिंदी संस्थान के विशिष्ट अतिथि प्रो. उमापति दीक्षित ने कहा कि अटल जी अपने नाम की तरह ही अपने निर्णयों के प्रति दृढ़ थे। वे किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले गंभीरता से विचार करते थे, लेकिन एक बार निर्णय कर लेने के बाद उस पर अटल रहते थे।

डॉ. शुभदा पांडे ने कहा कि अटल जी भारतीय राजनीति के ऐसे अजातशत्रु थे, जिनका सम्मान उनके राजनीतिक विरोधी भी करते थे। उनका व्यक्तित्व राजनीति की सीमाओं से कहीं बड़ा था।

संस्मरणों और गीतों ने जीवंत कर दिया अटल युग

आचार्य उमाशंकर पाराशर ने अटल जी से जुड़े संस्मरण सुनाने के साथ एक गीत प्रस्तुत किया। प्रभुदत्त उपाध्याय ने अटल जी की काव्य पंक्तियों के साथ उनके जीवन से जुड़े प्रसंग साझा किए।

कवि राकेश निर्मल ने अपनी गजल के माध्यम से महापुरुषों के अनुकरणीय व्यक्तित्व को शब्द दिए। केनरा बैंक के प्रबंधक अरुणेंद्र तिवारी ने अटल जी के जीवन से जुड़े कुछ अनसुने प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

अटल जी को श्रद्धांजलि

आगरा पुलिस विभाग में कार्यरत निरीक्षक प्रभात दीक्षित ने अटल जी के विराट व्यक्तित्व पर अपने विचार एवं संस्मरण साझा किए।

कार्यक्रम में उस समय वातावरण भावुक हो उठा, जब कवयित्री एवं अटल गीत गंगा परिवार की संस्थापक सदस्य डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपनी रचना प्रस्तुत की—

«“अटल देह तजकर कहाँ चल दिए,
अटल गीत गंगा ये बहती रहेगी।”»

इन पंक्तियों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और कई आंखें नम हो गईं।

सदियों में आते हैं ऐसे जनप्रिय नेता

अटल गीत गंगा परिवार के संस्थापक अध्यक्ष डीजीसी अशोक चौबे ने अटल गीत गंगा की स्थापना से जुड़े प्रसंग साझा किए और अपनी रचना के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की—

«“ऐसे जनप्रिय नेता तो सदियों में आते हैं,
कविवर अटल बिहारी की हम गाथा गाते हैं।”»

कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि पद्म गौतम ने किया। उन्होंने अपनी काव्य पंक्तियों के माध्यम से अटल जी के सौम्य, सरल और विराट व्यक्तित्व का चित्र खींचते हुए कहा—

«“नीर से विरल थे वो, सौम्य थे सरल थे वो,
खिले हुए कमलों का हार थे अटल जी।”»

अंत में अटल गीत गंगा परिवार की ओर से दीपक चौबे एवं मोहित जैन ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों और उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।

अटल बिहारी वाजपेयी : कवि से प्रधानमंत्री तक का प्रेरणादायी सफर

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ। वे भारतीय राजनीति के उन विरल व्यक्तित्वों में शामिल रहे, जिन्होंने अपनी वाक्पटुता, साहित्यिक संवेदना, लोकतांत्रिक मर्यादा और राष्ट्रनिष्ठा से राजनीति को एक अलग ऊंचाई प्रदान की।

वे भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेताओं में रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक नेताओं में शामिल हुए। वे कई बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और संसद में अपने प्रभावशाली वक्तृत्व के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध रहे।

अटल जी को श्रद्धांजलि देते कविजन।

अटल जी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 1996 में उनका कार्यकाल अल्प रहा। इसके बाद 1998 और फिर 1999 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला और 1999 से 2004 तक पूर्ण कार्यकाल पूरा किया।

उनके प्रधानमंत्रित्व काल में पोखरण-II परमाणु परीक्षण, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, दूरसंचार एवं बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल तथा पाकिस्तान के साथ शांति प्रयासों जैसी अनेक प्रमुख घटनाएं और नीतियां सामने आईं।

उनकी सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के माध्यम से देश के प्रमुख महानगरों को बेहतर राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया। उनके नेतृत्व में भारत ने बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लंबी छलांग लगाई।

राजनीति के साथ-साथ अटल जी एक संवेदनशील कवि, लेखक और ओजस्वी वक्ता भी थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम के साथ मानवीय संवेदना, संघर्ष, आशा और जीवन-दर्शन दिखाई देता है। उनकी रचनाओं ने उन्हें केवल राजनेता नहीं, बल्कि जनमानस के प्रिय साहित्यकार के रूप में भी स्थापित किया।

उनकी सेवाओं और राष्ट्र के प्रति योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 16 अगस्त 2018 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका व्यक्तित्व और विचार आज भी भारतीय लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन में प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

संपादकीय : अटल जी को याद करना यानी राजनीति में मर्यादा को याद करना

अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक प्रधानमंत्री या राजनेता नहीं थे। वे भारतीय लोकतंत्र की उस परंपरा के प्रतिनिधि थे, जिसमें राजनीतिक मतभेद व्यक्तिगत शत्रुता में नहीं बदलते थे। वे विपक्ष का सम्मान करते थे और विपक्ष भी उनके व्यक्तित्व का सम्मान करता था। यही कारण है कि उन्हें अजातशत्रु कहा गया।

आज जब सार्वजनिक जीवन में संवाद की जगह टकराव और असहमति की जगह कटुता बढ़ती दिखाई देती है, तब अटल जी की राजनीति और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि विचारों पर दृढ़ रहते हुए भी भाषा में शालीनता, व्यवहार में विनम्रता और राष्ट्रहित में व्यापक दृष्टि रखी जा सकती है।

‘अटल गीत गंगा परिवार’ द्वारा उनकी पुण्यतिथि पर साहित्यिक गोष्ठी आयोजित करना इसलिए सराहनीय है कि इस आयोजन ने अटल जी को केवल श्रद्धांजलि नहीं दी, बल्कि उनकी साहित्यिक चेतना, लोकतांत्रिक सोच और मानवीय व्यक्तित्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया।

आयोजकों और सभी वक्ताओं की यह पहल निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। अटल जी की स्मृति में यदि गीत गूंजते रहें, साहित्य बोलता रहे और उनके विचार नई पीढ़ी तक पहुंचते रहें, तो सच ही है—

“अटल देह तजकर कहाँ चल दिए,
अटल गीत गंगा ये बहती रहेगी…”

डॉ. भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh