आगरा। भारत की प्रथम शिक्षिका और महिला शिक्षा की अग्रदूत माता सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर शनिवार को आगरा में श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर शहर के ऐतिहासिक डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में विचार गोष्ठी और मिष्ठान वितरण का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बौद्ध धर्मगुरु भंते जी द्वारा माता सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय की निगरानी समिति के सदस्य अनिल सोनी उपस्थित रहे। उन्होंने माता सावित्रीबाई फुले के संघर्षपूर्ण जीवन और महिला शिक्षा के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अनिल सोनी ने कहा कि 3 जनवरी 1831 को जन्मी माता सावित्रीबाई फुले का विवाह कम उम्र में हो गया था और प्रारंभ में वे शिक्षित नहीं थीं। उनके पति महात्मा ज्योतिबा फुले ने स्वयं उन्हें शिक्षा प्रदान की। शिक्षित होने के बाद उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने का संकल्प लिया और वर्ष 1867 में सामाजिक विरोध के बावजूद इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य करना शुरू किया।
उन्होंने बताया कि उस समय समाज के एक वर्ग द्वारा उनके कार्य का तीव्र विरोध किया गया। रास्ते में अपमान, गालियां, कीचड़ और गोबर फेंकने जैसी घटनाओं के बावजूद माता सावित्रीबाई फुले अपने लक्ष्य से विचलित नहीं हुईं। वे विद्यालय पहुंचकर गंदी हो चुकी साड़ी बदलती थीं और फिर बालिकाओं को पढ़ाती थीं। उनका यह संघर्ष आज भी सामाजिक इतिहास की प्रेरणादायक मिसाल है।
मुख्य अतिथि ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले के दिखाए मार्ग पर आज उत्तर प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के प्रयासों से अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित निःशुल्क आईएएस/पीसीएस कोचिंग के माध्यम से 126 अभ्यर्थियों का यूपीएससी में चयन होना ऐतिहासिक उपलब्धि है।
कार्यक्रम में कौशलेंद्र सिंह, पूर्व राज्य मंत्री डॉ. रामबाबू हरित, कीमतीलाल जाटव, भाजपा नेता राकेश नेमीचंद, पूर्व पार्षद ईश्वरपाल, तेज कपूर, अशोक कुमार, दीपक सोनी, राजनारायण सिंह, राज कुमार, रूपसिंह सोनी, विनोद कुमार आनंद और श्रीमती राजमती सिंह सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने माता सावित्रीबाई फुले को नारी शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता की प्रतीक बताते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों को मिष्ठान वितरित किया गया और माता सावित्रीबाई फुले के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।
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