आगरा। थाना हरीपर्वत क्षेत्र में पैतृक संपत्ति को लेकर वर्षों से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब गंभीर आपराधिक मामले में तब्दील हो गया है। अनुराग वशिष्ठ की शिकायत पर उनकी बहन अर्चना वशिष्ठ, बहनोई राजेश दत्त शर्मा तथा दो अन्य सहयोगियों के खिलाफ फर्जी वसीयत, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार अनुराग वशिष्ठ के पिता स्वर्गीय युवराज सिंह वशिष्ठ मकान संख्या 2/200-ए और 2/200-1 के एकमात्र एवं निर्विवाद मालिक थे। लंबी बीमारी के बाद 1 सितंबर 2024 को उनका निधन हो गया। आरोप है कि बीमारी के दौरान बहन अर्चना वशिष्ठ और बहनोई राजेश दत्त शर्मा इलाज के बहाने उन्हें बार-बार बाहर ले जाते थे और इसी अवधि में 10 फरवरी 2023 को कथित रूप से बहला-फुसलाकर आगरा सदर तहसील में अपने पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत पंजीकृत करा ली।
मामले की जानकारी मिलने पर स्वर्गीय युवराज सिंह वशिष्ठ ने 3 मई 2023 को विधिवत पंजीकृत दस्तावेज के माध्यम से उक्त पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत को निरस्त कर दिया। इसके बाद 22 मई 2023 को उन्होंने अपने दोनों नातियों के नाम अंतिम और वैध पंजीकृत वसीयत कर दी।
इसके बावजूद आरोप है कि बहन-बहनोई ने संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से दो फर्जी और अपंजीकृत वसीयतें तैयार कराईं। इन वसीयतों की तारीखें 24 जून 2023 और 26 अगस्त 2024 दर्शाई गई हैं, जिनमें स्वर्गीय युवराज सिंह वशिष्ठ के कूटरचित हस्ताक्षर बनाए गए। शिकायत में हर्ष कोहली और हरीश चंद्र कोहली की भूमिका भी इन दस्तावेजों को तैयार कराने में बताई गई है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायत में कहा गया है कि 26 अगस्त 2024 की कथित वसीयत का मसौदा एक अधिवक्ता के नाम से लिखा होना दर्शाया गया, जबकि संबंधित अधिवक्ता ने शपथपत्र देकर स्पष्ट किया है कि उक्त दस्तावेज न तो उनके द्वारा लिखा गया और न ही तैयार किया गया।
अनुराग वशिष्ठ का आरोप है कि इन फर्जी वसीयतों के आधार पर संपत्ति को विवादित बताकर उन्हें घर से बेदखल करने का दबाव बनाया जा रहा था। साथ ही समझौते के नाम पर अवैध रूप से चौथ मांगने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां भी दी जा रही थीं। लगातार उत्पीड़न से परेशान होकर उन्होंने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई।
थाना हरीपर्वत पुलिस ने शिकायत के आधार पर सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पंजीकृत व अपंजीकृत सभी दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और शपथपत्रों की विधिक जांच कराई जाएगी तथा साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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