आगरा। जाम लगे या कोई हल्कान रहे, मेरी मर्जी। किसमें है दम जो हमें अतिक्रमण से रोक सके। जी हां। हम बात कर रहे है बेलनगंज चौराहे की। यहां जाम से हांफती सड़कें अतिक्रमण के चलते गली के रूप में तब्दील हो जाती है। पल-पल जाम लगता रहता है। चौराहे पर पुलिस की पिकेट भी रहती है, लेकिन वह दुकानदारों की लस्सी और जूस के आगे ठंडी पड़ी रहती है।
जाम में फंसकर राहगीर परेशान होता है तो होता रहे, मजाल है कि पुलिस के जवान जाम खुलवाने की जहमत उठाए। बेलनगंज चौराहे पर लगने वाले जाम के लिए दुकानदारों का अतिक्रमण ही जिम्मेदार है। आलम यह है कि हम यहां के सिकंदर की तर्ज पर दुकानदार दुकानों के आगे सड़क घेरकर दुकानें सजा लेते हैं। कोढ़ में खाज का काम खरीददारी करने आने वाले अपने वाहन आड़े-तिरछे खडेकर पैदा करते हैं।
दुकानदारों की मर्जी के कारण यहां जाम की स्थिति पैदा होती है। बावजूद इसके जिम्मेवार विभाग इस ओर से आखें मूंदें हुए हैं। इस भीषण गर्मी में राहगीर जाम में फंसकर पसीना-पसीना हो रहे हैं।
खरीदारों को दुकानदार नहीं देते नसीहत
बेलनगंज चौराहे पर किराने की दुकान पर खरीददारी करने आने वाले ग्राहक अपने वाहन को बीच सड़क पर ही खड़ा कर देते हैं। इसके चलते जाम लग जाता है लेकिन दुकानदार उनसे वाहन को सही से खड़ा करने की कहने की भी हिम्मत नही करता .ऐसा करता है तो उसे ग्राहक के जाने का डर सताने लगता है इसलिए उसे जाम मंजूर है लेकिन ग्राहक को टोकना मंजूर नही है।
पुलिस के जवान मूंदे रहते हैं आखें
बेलनगंज चौराहे पर हर थोड़ी थोड़ी देर के बाद जाम लगता रहता है। चौराहे पर पुलिस का पिकेट तैनात रहता है, लेकिन ऐसे खड़े रहते हैं जैसे उन्हें इससे कोई मतलव ही नहीं है।
पुलिस के जवान कोने में छाव के नीचे आराम फरमाते हैं और दुकानदार उनकी खातिरदारी को तैयार रहते हैं। एक आवाज देने पर लस्सी और जूस हाजिर हो जाता है। इस चौराहे पर सुबह 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक जाम की स्थिति बनी रहती है। पैदल निकलना भी दुश्वार होता है। स्थानीय लोगो ने बेलनगंज चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था की मांग की है।
साभार-nni
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