आगरा के बेसिक शिक्षा विभाग में सोमवार का दिन भारी उथल-पुथल भरा रहा, जब शासन स्तर से जारी खंड शिक्षाधिकारियों (बीईओ) की ट्रांसफर और अनुमोदन सूची ने अचानक गलियारों में सनसनी फैला दी। इस नई सूची के मुताबिक, नगर क्षेत्र के स्थापित खंड शिक्षाधिकारी सुमित कुमार के स्थान पर एक सहायक अध्यापक का नाम अंकित होकर सामने आ गया। जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, महकमे में यह सवाल कौंधने लगा कि आखिर अब शहर का नया शिक्षाधिकारी कौन है।
दरअसल, सोमवार को शासन की ओर से प्रदेश भर के कुल 121 बीईओ के तबादलों से जुड़ा अनुमोदन पत्र जारी किया गया था, जिसमें आगरा जिले के अधिकारी भी शामिल थे। इस सूची के क्रम संख्या 95 पर जब नजर पड़ी, तो नगर क्षेत्र के बीईओ के ठीक सामने ‘कर्ण सिंह धाकड़’ का नाम दर्ज देखकर शिक्षक और तमाम कर्मचारी भौंचक्के रह गए।
सूची सामने आते ही महकमे में सुगबुगाहट तेज हो गई और एक-दूसरे से यह सवाल पूछे जाने लगे कि आखिर ये नए बीईओ कौन हैं। किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा था कि पिछले तीन साल से अधिक वक्त से नगर क्षेत्र की कमान संभाल रहे सुमित कुमार की जगह अचानक कर्ण सिंह धाकड़ का नाम कैसे जुड़ गया। मामला इसलिए भी पेचीदा और आश्चर्यजनक था क्योंकि सुमित कुमार इस पद पर लंबी अवधि से अपनी सेवाएं दे रहे थे। जब विभागीय स्तर पर छानबीन की गई तो यह तथ्य सामने आया कि सूची में जिनका नाम आया है, वे कोई अन्य अधिकारी नहीं बल्कि नगर क्षेत्र में ही बतौर सहायक अध्यापक कार्यरत हैं। इस बड़ी प्रशासनिक चूक के उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो गया।
हालांकि, इस गलती पर पर्दा डालने या इसे सुधारने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। जब शासन और उच्चाधिकारियों तक इस त्रुटि की भनक पहुंची, तो कुछ ही घंटों के भीतर एक संशोधित अनुमोदन पत्र जारी कर दिया गया। इस नए और सुधरे हुए पत्र से कर्ण सिंह धाकड़ का नाम पूरी तरह हटा दिया गया। सिर्फ इतना ही नहीं, संशोधन के दौरान नगर क्षेत्र के खंड शिक्षाधिकारी सुमित कुमार समेत दो अन्य बीईओ के नाम भी इस ट्रांसफर सूची से बाहर कर दिए गए। इस तरह, जिस सूची ने जारी होते ही विभाग में भूचाल ला दिया था और यह असमंजस पैदा कर दिया था कि नया बीईओ कौन है, चंद घंटों के अंतराल में आए संशोधन ने पूरे घटनाक्रम की तस्वीर ही बदलकर रख दी।
इस तरह के महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पद की स्थानांतरण सूची में किसी सहायक अध्यापक का नाम गलती से दर्ज हो जाना सीधे तौर पर विभागीय कार्यकुशलता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े करता है। शिक्षकों और कार्यालय के कर्मचारियों के बीच पूरे दिन यही चर्चा छाई रही कि आखिरकार शासन को भेजी जाने वाली मूल जानकारी या प्रस्ताव में यह त्रुटि किस स्तर पर हुई और बिना किसी पुख्ता सत्यापन के यह नाम फाइनल सूची तक कैसे पहुंच गया। हालांकि, विभाग ने तत्परता दिखाते हुए कुछ ही पलों के भीतर संशोधित पत्र जारी कर गलती का सुधार कर लिया, लेकिन इस पूरे वाकये ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की बहस को जरूर हवा दे दी है।
उल्लेखनीय है कि नगर क्षेत्र के खंड शिक्षाधिकारी सुमित कुमार पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से इस महत्वपूर्ण पद पर लगातार कार्यरत चले आ रहे हैं। ऐसे में उनके स्थान पर एक सहायक अध्यापक का नाम अचानक प्रकट हो जाना विभाग के लिए भी असहज करने वाली स्थिति बन गई थी।
हालांकि अब संशोधित सूची के सामने आने के बाद धुंध छंट चुकी है और स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है, फिर भी एक ही दिन के भीतर सूची का जारी होना और फिर उसमें रातों-रात संशोधन होना शिक्षा विभाग के गलियारों में अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है। सबसे बड़ा और अहम सवाल आज भी यही बना हुआ है कि बीईओ स्तर के तबादलों जैसी गंभीर प्रक्रिया में इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हो गई?
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