आगरा। चर्चित राणा सांगा केस में वादी अजय प्रताप सिंह एडवोकेट आदि बनाम अखिलेश यादव आदि की याचिका को निचली अदालत द्वारा 10 अप्रैल को खारिज किए जाने के बाद आज उस आदेश के विरुद्ध आगरा के जिला जज की अदालत में सिविल रिवीजन दायर किया गया।
वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर, एसपी सिंह सिकरवार, नरेश सिकरवार न्यायालय में उपस्थित रहे। बहस के दौरान अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर ने न्यायालय को बताया कि निचली अदालत का आदेश नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। अवर न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि वह बयान संसद में दिया गया है जिसके एवज में वादीगण घोषणा चाहते है, लेकिन वाद पत्र में यह कहीं नहीं लिखा गया है कि वह बयान संसद में दिया गया है,
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्री तोमर ने सुप्रीम कोर्ट के दो प्रमुख निर्णयों का हवाला दिया और बताया कि हरि हनुमान दास तोतला बनाम हेमंत विट्ठल कामत केस में कहा गया कि वाद की पोषणीयता केवल वाद पत्र के कथनों के आधार पर तय होगी, न कि जवाब या अन्य साक्ष्य के आधार पर। इसी प्रकार एम. गुरुदास बनाम रासराजन केस में यह प्रतिपादित किया गया कि विवादित प्रश्नों के आधार पर वाद को पोषणीयता के स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता।
जनपद न्यायाधीश न्यायालय ने अब मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 मई निर्धारित की है।
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