आगरा। जनपद में संचालित गौशालाओं की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने और निराश्रित गौवंश संरक्षण को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गौशालाओं की स्थिति, व्यवस्थाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद की सभी गौशालाओं में मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही सड़कों और खेतों में विचरण कर रहे गौवंशों को विशेष अभियान चलाकर गौआश्रय स्थलों में संरक्षित कराया जाए। उन्होंने कहा कि भरण-पोषण एवं सहभागिता से संबंधित मांग पत्र प्रत्येक माह की 25 तारीख तक सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को भेजा जाए, ताकि समय से शासन को अग्रसारित किया जा सके।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि 1 जनवरी से सभी पंचायत सचिव गौआश्रय पोर्टल पर प्रतिदिन पशुओं की संख्या, खिलाए गए भूसा, हरे चारे और पशु आहार की मात्रा अपलोड करना सुनिश्चित करें। गौआश्रय स्थलों की सभी पंजिकाओं के साथ गोबर उत्सर्जन पंजिका को भी नियमित रूप से भरा जाए और गोबर से होने वाली आय का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि नर, मादा, रोगी पशुओं और बछड़ों को अलग-अलग रखा जाए। मृत पशुओं का तत्काल और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराया जाए, इसके लिए गहरे गड्ढे खोदकर शवदाह किया जाए। ग्राम पंचायतों की हदबंदी की भूमि पर गौ समाधि स्थल या पशु शवदाह गृह बनाने के भी निर्देश दिए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक तीन दिन में एडीओ पंचायत, खंड विकास अधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करें। जनपद में अच्छा कार्य कर रहे एनजीओ, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को भी गौशालाओं की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित किया जाए।
गौआश्रय स्थलों में नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए गोबर के लट्ठे, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की अगरबत्ती, दीपक, गोनायल, गोबर गैस, खाद और जीवामृत जैसे उत्पाद तैयार करने के लिए स्वयं सहायता समूहों को प्रेरित करने के निर्देश दिए गए। गोबर के लट्ठे बनाने की मशीन लगवाने और सर्दी से बचाव के लिए त्रिपाल, टाट, जूट की बोरी तथा अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
पशुओं के पोषण को लेकर निर्देश दिए गए कि प्रतिदिन प्रत्येक गौवंश को तीन किलो भूसा, पांच किलो हरी घास और आधा किलो संतुलित पशु आहार दिया जाए। हरा चारा उपलब्ध न होने की स्थिति में दो किलो भूसा, तीन किलो साइलेंज और आधा किलो पशु आहार खिलाने के निर्देश दिए गए। मनरेगा कन्वर्जेन्स के माध्यम से हरे चारे की बुवाई, खाइयों का निर्माण और मेड़ पर मोरिंगा व एट्रोफा के पौधे लगाने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी कहा गया कि आठ किलोमीटर के दायरे में आने वाली चारागाह भूमि को गौआश्रय स्थलों से टैग कराया जाए। फरवरी से शुरू होने वाली नेपियर घास की बुवाई को देखते हुए अभी से खेतों की तैयारी की जाए और किसानों से एमओयू कर 2 से 3 रुपये प्रति किलो की दर से हरा चारा प्राप्त करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्य विकास अधिकारी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भूसा और पशु आहार क्रय का टेंडर मार्च तक कराने तथा सभी गौशालाओं की सीसीटीवी के माध्यम से प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डेय, परियोजना निदेशक डीआरडीए श्रीमती रेनू, उपायुक्त मनरेगा रामायण सिंह यादव, उपायुक्त एनआरएलएम राजन राय, जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार, नगर निगम आगरा सहित समस्त खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, पंचायत सचिव और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी मौजूद रहे।
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