आगरा। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर गुरुद्वारा गुरु का ताल स्थित भाई नंदलाल हॉल में श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण अलौकिक कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। अमृतमयी गुरबाणी के मधुर स्वरों से समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और भक्तिरस से सराबोर हो उठा। संगत ने पूरे समागम के दौरान गुरुवाणी श्रवण और नाम-सिमरन के माध्यम से आत्मिक आनंद की अनुभूति की।
कीर्तन दरबार में वीर महेंद्र पाल सिंह तथा विशेष रूप से आमंत्रित भाई अमरजीत सिंह (पटियाला वाले) ने अपनी सुमधुर रसना से गुरबाणी का कीर्तन कर संगत को निहाल किया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गुरु ग्रंथ साहिब महाराज के पावन प्रकाश के साथ हुआ। इसके उपरांत जटाना परिवार एवं सुखमनी सेवा सभा द्वारा श्रद्धाभाव से जपजी साहिब का पाठ संपन्न कराया गया।
इसके बाद वीर महेंद्र पाल सिंह ने भावपूर्ण कीर्तन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि जिस प्रकार थोड़े समय में किया गया भोजन कई घंटों तक शरीर को तृप्त रखता है, उसी प्रकार कुछ क्षणों का सच्चे मन से किया गया नाम-सिमरन मनुष्य को असंख्य पापों से मुक्त कर जीवन को सकारात्मक दिशा देता है।
विशेष आमंत्रित भाई अमरजीत सिंह (पटियाला वाले) ने बसंत राग में शबद गायन कर संगत को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर उपस्थित संत बाबा प्रीतम सिंह ने संगत को आशीर्वचन देते हुए कहा कि मौनी अमावस्या जैसे पावन दिवस पर गुरबाणी श्रवण और नाम-सिमरन करने से मन निर्मल होता है तथा जीवन प्रभु की शरण में समर्पित हो जाता है। उन्होंने कहा कि सेवा, सिमरन और संगत ही जीवन की सच्ची कमाई है।
कार्यक्रम के दौरान जटाना परिवार की ओर से वीर महेंद्र पाल सिंह, भाई अमरजीत सिंह एवं संत बाबा प्रीतम सिंह को सम्मानित किया गया। वहीं संत बाबा प्रीतम सिंह द्वारा संजय जटाना एवं अंशुल जटाना को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
समागम के समापन पर बाबा हरबंस सिंह द्वारा अरदास के उपरांत गुरु महाराज का अटूट लंगर वरताया गया, जिसे विशाल संगत ने प्रेम और श्रद्धा भाव से ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन सरदार गुरमीत सिंह सेठी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर रिंकू गुलाटी, मनीष नागरानी, बिट्टू चावला, गुरु सेवक श्याम भोजवानी, सुरजीत छाबड़ा, सतपाल सिंह बत्रा, दलजीत सिंह सेतिया, हरपाल सिंह, तेजपाल सिंह, रोबी जी, समीर ढींगरा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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