Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा, वृन्दावन। वृन्दावन के प्रसिद्ध श्री बांकेबिहारी मंदिर के आंगन का फर्श अचानक धंस गया। इससे सेवायत गोस्वामियों में खलबली मच गई। सूचना मंदिर प्रबंधन को दी गई। सिविल इंजीनियरों की मदद से फर्श की खोदाई का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे प्रभावित क्षेत्र की मरम्मत के साथ इसके कारण की जांच भी की जा सके।
देखकर सेवायत गोस्वामियों में खलबली मच गयी
विश्व प्रसिद्ध बांकेबिहारी जी का मंदिर लगभग 1864 में स्वामी श्री हरिदास जी ने अपने अनन्य भक्तों व अपने ही परिवारीजनों की सहायता से इसका निमार्ण कराया था। लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने इस मंदिर की बहुत मान्यता है देश विदेश से लाखों दर्शनार्थी पूरे वर्ष यहां आते हैं। यह मंदिर सामान्य दिनों में खचाखच भरा रहता है हरियाली तीज के दिन तो मंदिर में तिल रखने की भी जगह नहीं मिलती है। इतने प्राचीन मंदिर का फर्श अन्दर से खाली हो चुका है। इसे देखकर सेवायत गोस्वामियों में मची खलबली मच गयी।
सिविल इंजीनियरों की मदद निर्माण विशेषज्ञों को दिल्ली से बुलाया
कोरोना संक्रमण काल में जहां श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पट आम भक्तों के लिए अभी तक बंद हैं। वहीं सेवायत गोस्वामी विधिवत पूजा सेवा कर रहे हैं। इस दौरान सेवायतों को मंदिर का फर्श कई जगह से धंसा हुआ दिखाई देने लगा। मंदिर के मुख्य आंगन का फर्श कुछ स्थानों पर धंस गया है। इसकी जानकारी तत्काल ही मंदिर प्रबंधन को दी गई। आवश्यक अनुमति की निर्धारित प्रक्रिया करने के बाद मंदिर के आंगन में संबंधित क्षेत्र की खोदाई का काम शुरू किया गया। गर्भगृह के सामने वाले क्षेत्र में करीब दो से तीन फीट खोदाई के वाद पता चला कि जमीन में पोल और गीलापन दिखाई देने लगा। इस कार्य के लिए मंदिर प्रबंधन ने सिविल इंजीनियरों को बुलाया कि इसका उपाय क्या है। साथ ही निर्माण विशेषज्ञों को दिल्ली से भी बुलाया गया है। जिससे मंदिर फर्श के धंसने के कारणों का पता लगाया जा सकेगा। और इसके मरम्मत का कार्य भी किया जा सकेगा।
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