आगरा। किशोरी के अपहरण, उसे बेचने और दुराचार जैसे जघन्य अपराध के एक मामले में 18 वर्षों बाद न्याय का फैसला आया है। आगरा विशेष अदालत ने मलपुरा थाना क्षेत्र से जुड़े इस सनसनीखेज प्रकरण में पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजाएं सुनाईं। अदालत के निर्णय से पीड़िता और उसके परिवार को लंबे इंतजार के बाद राहत मिली है।
तीन दोषियों को उम्रकैद, दो को कारावास और भारी जुर्माना
अदालत ने प्रीतम, हाकिम और विजयपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर दो-दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। वहीं आरोपी बाबू को अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी मानते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास तथा 41 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। एक महिला आरोपी को किशोरी को बंधक बनाकर रखने के अपराध में एक वर्ष के कारावास की सजा दी गई है।
2007 का मामला, 15 वर्षीय किशोरी का अपहरण
अभियोजन के अनुसार वर्ष 2007 में 15 वर्षीय किशोरी का अपहरण किया गया था। आरोपियों ने उसे अलग-अलग स्थानों पर बंधक बनाकर रखा और उसके साथ दुराचार किया। जांच में यह भी सिद्ध हुआ कि किशोरी को 50 हजार रुपये में बेच दिया गया था। पुलिस ने उसे बरामद कर अदालत में प्रस्तुत किया, जिसके बाद मामले की लंबी सुनवाई चली।
नाबालिगों के खिलाफ अपराध पर सख्त संदेश
18 साल बाद आए इस फैसले को न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी स्वीकार्य नहीं होगी। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे नजीर करार दिया है।
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