Agra News: भाजपा मंडल अध्यक्ष की ‘फिल्मी साजिश’ का पर्दाफाश, अपनी ही गाड़ी चोरी करवाकर पुलिस को गुमराह करने वाला नेता अब वारंट के घेरे में

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आगरा: ताजनगरी के राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब जगनेर के भाजपा मंडल अध्यक्ष देवकी नंदन शर्मा का एक कथित ‘करतूत नामा’ सामने आया। अपनी ही बोलेरो गाड़ी को चोरी करवाने की झूठी कहानी रचकर पुलिस को गुमराह करने वाले इस नेता की पोल टोल टैक्स के एक मैसेज ने खोल दी। अब कोर्ट ने उनके और उनके भाई के खिलाफ वारंट जारी कर दिया है।

​साजिश का ‘मास्टरप्लान’

पुलिस जांच के अनुसार, भाजपा नेता देवकी नंदन शर्मा ने पहले अपनी बोलेरो एक व्यक्ति को बेची और पूरी रकम वसूल ली। लेकिन, शातिर तरीके से उन्होंने गाड़ी का मालिकाना हक (ट्रांसफर) खरीदार के नाम नहीं किया। इसके बाद, उन्होंने एक डुप्लीकेट चाबी बनवाकर खरीदार के घर के बाहर खड़ी उसी गाड़ी को ‘चोरी’ करवा लिया। गाड़ी को जयपुर ले जाकर करीब दो लाख रुपये में दोबारा बेच दिया गया। अपनी करतूत पर पर्दा डालने के लिए उन्होंने खुद ही पुलिस थाने में चोरी की एफआईआर भी दर्ज करा दी, ताकि किसी को शक न हो।

​टोल के मैसेज ने बिछाया जाल

पुलिस ने मामले को शुरुआत में गंभीरता से लिया, लेकिन सुराग न मिलने पर केस बंद कर दिया। खेल तब बिगड़ा जब चोरी हो चुकी गाड़ी के टोल टैक्स के मैसेज असली मालिक के फोन पर आने लगे। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों ने साबित कर दिया कि चोरी की एफआईआर लिखवाने वाला व्यक्ति ही इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार था।

​400 पन्नों की चार्जशीट और गिरफ्तारी का वारंट

पुलिस ने साक्ष्यों को आधार बनाते हुए करीब 400 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। इसमें भाजपा नेता और उनके भाई को साजिश का मुख्य दोषी बताया गया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब दोनों आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी कर दिए हैं।

​राजनीतिक जगत में चर्चाओं का बाजार गर्म

यह मामला न केवल एक आपराधिक घटना है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जब देवकी नंदन शर्मा को मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तब भी यह मामला दबी जुबान में उठा था, लेकिन कुछ समय बाद मामला शांत हो गया। अब कोर्ट के वारंट जारी होने के बाद स्थानीय स्तर पर उनकी छवि को भारी झटका लगा है और जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कानून का रक्षक बनने का दावा करने वाले कैसे खुद ही कानून का मखौल उड़ा सकते हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh