आगरा। फतेहाबाद तहसील के रेहावली गांव में उटंगन नदी पर बांध बनाया जाना सैद्धान्तिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है,जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने इस बाध के लिये सिंचाई विभाग को कार्य योजना और लागत आंकलन बनाने का निर्देश दिया है।जिला पंचायत अध्यक्ष ने जनपद की सिंचाई बंधु की गत मीटिंग में इसके लिये सर्वेक्षण कर व्यवाहरिकता का आंकलन करने को अधिशासी अभियंता लोअर यमुना कैनाल से कहा था।जिसके आधार पर सिंचाई विभाग की टीम ने रेहावली गांव जाकर उटंगन नदी में मानसून कालीन जल विस्तार क्षेत्र का आंकलन किया । उटंगन नदी जनपद की यमुना और चंबल नदी के बाद सबसे बडी नदी है और लगभग 70 कि मी बहकर यमुना नदी में समाती है।
मानसून काल में यमुना नदी जब भी आगरा में लोफ्लड लेवल क्रॉस करती है,उटंगन नदी बैक मारना शुरू कर देती है और इसमें अरनौटा रेलवे ब्रिज से भी 2 कि मी तक पानी की भरपूरता रहती है। यमुना नदी से बैक कर पहुंचे पानी के साथ ही फतेहाबाद गांव के नगला बिहारी के अपस्ट्रीम में जगनेर की 34 बंधियों का अक्टूबर को होने वाले डिस्चार्ज ,किबाड नदी,नदी, खारी नदी,पार्वती नदी और टर्मिनल राजवाह और का पानी भी पर्याप्त मात्रा में इसमें पहुंचता है।यह विपुल जलराशि कितनी होती है यह तो सिंचाई विभाग की आंकलन रिपोर्ट के बाद ही मालूम हो सकेगा किंतु सतही आंकलन के अनुसार उटंगन के यमुना नदी में समाहित होने के स्थान से रेहवाली से अरनौटा के रेलवे पुल तक की दूरी लगभग 9 कि मी है।अगर इस जल राशि को होल्ड कर स्थानीय किसानों की जरूरतों के अनुसार रेग्युलेट किया जा सका तो इस पानी से जहां बाह,पिनाहट और फतेहाबाद विकासखंड के दर्जनों गांवों में भूजल की मौजूदा स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
इसी के साथ ही फतेहाबाद नगर पंचायत क्षेत्र को पाइप लाइन डाल कर मीठे पानी(धौलपुर में पार्वती नदी पर बने आंगई डैम पैटर्न ) की भरपूरता से सप्लाई की जा सकती है। इस पानी का उपयोग मानसून काल के बाद बटेश्वर धाम तीर्थ के विशेष पर्वों पर यमुना में पानी की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार के लिये भी किया जा सकता है।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा (regd) के जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती भदौरिया से मिले प्रतिनिधि मंडल ने अनुरोध किया कि एस्टीमेट बन जाने के बाद योजना को शासन के पास भेजा जाए ।जहां तक फंडिंग की बात है अधिकांश कार्य जिला योजना स्तर से भी करवाये जा सकते हैं। मनरेगा योजना के तहत भी बांध के अधिकांश कार्य करवाये जा सकते हैं। कार्यस्थल से पाँच कि मी दूर के गांवों के की श्रम शक्ति और धन का उपयोग इस योजना के लिये किया जाना संभव है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि योजना प्रारूप सामने आ जाने पर उन कार्यों का आंकलन करवायेंगी जो कि मनरेगा योजना के तहत किये जाना संभव है।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा (regd) की ओर से जि.पं. अध्यक्ष से मिलने वालों में सेक्रेटरी अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना और असलम सलीमी आदि शामिल थे।
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