मथुरा: उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक तीर्थ स्थल मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र के अंतर्गत जुल्हेंदी स्थित ‘चित्रगुप्त पीठ’ में रविवार की सुबह से ही कारसेवा और सनातन धर्म के उत्थान के लिए विशेष हवन-पूजन का कार्यक्रम विधिवत रूप से शुरू हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान और हवन-यज्ञ की पूर्णाहूति के पश्चात देश भर से पधारे प्रमुख साधु-संतों और धर्माचार्यों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक घोषणा की गई कि अब आगामी 6 दिसंबर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य कारसेवा की जाएगी। इस तमाम घटनाक्रम के मद्देनजर एहतियात के तौर पर चित्रगुप्त पीठ के बाहर और आसपास के पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तथा सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया था।
राधाकुंड स्थित चित्रगुप्त पीठ में संपन्न हुए इस हवन-यज्ञ के बाद “कृष्णा लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे” के गगनभेदी नारों के साथ साधु-संतों ने कारसेवा का औपचारिक शंखनाद किया। इस दौरान बड़ी संख्या में दूर-दराज से आए साधु-संतों ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
ज्ञात हो कि इतिहास में 6 दिसंबर वही तारीख है, जब अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित ढांचे को गिराया था, और अब इसी ऐतिहासिक दिन को ध्यान में रखते हुए मथुरा में भी कारसेवा का बड़ा एलान किया गया है।
चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि पूर्व में 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कारसेवा करने का खुला एलान किया गया था, लेकिन सावन मास के पवित्र महीने और कावड़ यात्रा के भारी दबाव व प्रशासनिक व्यवस्थाओं के चलते उस समय कारसेवा के कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था।
रविवार को आयोजित इस शंखनाद कार्यक्रम में देश के विभिन्न अखाड़ों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संत-महात्मा पहुंचे और उन्होंने इस संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए अपनी सहमति दी।
आश्रम पहुंच चुकी है पत्थरों की पहली खेप
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर एक भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण के पावन इरादे से राजस्थान के प्रसिद्ध भरतपुर जिले स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए विशेष गुलाबी पत्थरों की पहली खेप पहले ही शुक्रवार की देर रात सुरक्षित रूप से चित्रगुप्त पीठ पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि ठीक इन्हीं गुलाबी पत्थरों का उपयोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण में भी किया गया है।
चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की पहल पर मंगवाए गए इन पत्थरों को लेकर उन्होंने पहले ही स्पष्ट किया था कि भगवान श्रीकृष्ण का यह भव्य मंदिर उनकी अपनी जन्मस्थली पर ही पुनर्निर्मित किया जाएगा। इसी बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए गुलाबी रंग के कुल पांच हजार मीट्रिक टन पत्थरों का बड़ा ऑर्डर दिया गया है, जिन्हें लेकर संतों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
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