उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के जलालाबाद में 18 साल पहले हुए एक फर्जी एनकाउंटर के मामले में कोर्ट ने 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोप है कि कटरी में हुई इस फर्जी मुठभेड़ में अपने खेत में काम करने वाले दो लोगों की मौत हुई थी। हालांकि पुलिस ने यह कहते हुए फाइल बंद कर दी थी कि डकैतों के एक गिरोह के सदस्यों के बीच मुठभेड़ हुई थी।
इस मामले में जिन 18 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश सेशन कोर्ट ने दिया है, उनमें तत्कालीन एसपी सुशील कुमार सिंह, एएसपी माता प्रसाद और तीन सर्कल ऑफिसर रैंक के पुलिस अधिकारी मुन्नू लाल, जयकरन सिंह भदौरिया और आरके सिंह शामिल हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जलालाबाद पुलिस स्टेशन के एसएचओ जयशंकर सिंह ने बताया कि ‘हमने 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 342 (गलत तरीके से कारावास) और 302 (हत्या) के तहत एफआईआर दर्ज की है। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई है।’
क्या था मामला
बता दें कि जलालाबाद के चचुआपुर गांव निवासी धनपाल व प्रहलाद की वर्ष 2004 को दस्यु सरगना नरेश धीमर गिरोह का सदस्य बताकर पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया था। इस संबंध में एसपी एस आनंद ने बताया कि वर्ष 2004 में पुलिस और दस्यु गिरोह की मुठभेड़ हुई थी। दो लोगों की मौत हुई थी। सीबीसीआईडी ने इस मामले की विवेचना पूरी की थी। बताया कि वर्ष 2012 में मृतक बदमाश के परिवार के सदस्य ने कोर्ट के जरिए आवेदन कर अपील की थी। आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को दी गई है।
-एजेंसियां
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