प्रयागराज की महिमा बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल: खेतों में मजदूरी करने वाली बेटी ‘एजुकेट गर्ल्स’ और RSETI के जरिए बनी आत्मनिर्भर

PRESS RELEASE

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की 21 वर्षीय महिमा की कहानी आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बनकर उभर रही है। कभी परिवार का पेट पालने के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली महिमा आज न सिर्फ अपनी बी.एससी. की पढ़ाई पूरी कर रही हैं, बल्कि गैर-सरकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ से जुड़कर गाँव-गाँव जाकर बालिकाओं को स्कूल पहुँचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का नेतृत्व भी कर रही हैं।

संघर्षों के बीच जारी रखी पढ़ाई

महिमा के परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से ही ठीक नहीं थी। पिता के बाहर मजदूरी करने और अपनी खेती की जमीन न होने के कारण परिवार को जीवनयापन के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी। सबसे बड़ी बेटी होने के नाते महिमा, उनकी माँ और भाई-बहनों को दूसरों के खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती थी। इसके बावजूद महिमा ने हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखी। हालाँकि, आर्थिक दिक्कतों के चलते महिमा में आत्मविश्वास की भारी कमी थी और वे अजनबियों के सामने बोलने से भी कतराती थीं।

‘टीम बालिका’ से जुड़ाव और जीवन का अहम् मोड़

महिमा के जीवन में बदलाव तब आया, जब वे ‘एजुकेट गर्ल्स’ की ‘टीम बालिका’ से एक सक्रिय सदस्य के तौर में जुड़ीं। उन्होंने गाँव के घर-घर जाकर अभिभावकों को बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूक किया, बालिकाओं का स्कूल में दाखिला सुनिश्चित कराया और ‘विद्या कुंभ’ व समर कैंपों जैसे आयोजनों का संचालन किया। जन-संवाद के इस काम ने महिमा की झिझक दूर की और उनके भीतर छिपी लीडरशिप को बाहर निकाला।

आरएसईटीआई से सिलाई सीखकर बनीं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर

सामाजिक बदलाव के साथ-साथ खुद के पैरों पर खड़े होने के लिए महिमा ने ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) द्वारा संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) से सिलाई का हुनर सीखा। सिलाई कार्य से मिली पहली कमाई ने उनके आत्मबल को कई गुना बढ़ा दिया। अब वे अपनी पढ़ाई के खर्च के साथ-साथ परिवार को भी आर्थिक सहारा दे रही हैं।

“अब आँखें मिलाकर बात कर सकती हूँ”: महिमा

अपने इस बदलाव के सफर पर महिमा कहती हैं कि शुरुआत में मैं बहुत शांत थी और मुझे खुद पर भरोसा नहीं था, लेकिन ‘एजुकेट गर्ल्स’ की गतिविधियों से जुड़कर मेरा खोया हुआ आत्मविश्वास वापस आया। मैंने लोगों से आँखें मिलाकर बात करना सीखा। आज मैं न सिर्फ अपनी बात बेबाकी से रख सकती हूँ, बल्कि दूसरी लड़कियों को भी आगे बढ़ने का हौंसला दे रही हूँ।

वर्तमान में महिमा उच्च शिक्षा के साथ-साथ गाँव की अन्य बालिकाओं को शिक्षा हासिल करने और नए कौशल सीखने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh