आगरा में सपा का उग्र प्रदर्शन: शहीद स्मारक पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकने को लेकर पुलिस और सपाइयों में तीखी झड़प

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आगरा: उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के ‘संविधान बचाओ–लोकतंत्र बचाओ’ आंदोलन के तहत आयोजित प्रदर्शन के दौरान उस वक्त भारी हंगामा और तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब सपा की महिला और यूथ विंग के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंकने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने जब पुतला दहन रोकने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों और सपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाथापाई और धक्का-मुक्की तक जा पहुंची। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान उनके साथ अभद्रता की गई और एक पुलिसकर्मी ने जानबूझकर कार्यकर्ता की टांग अड़ाकर उसे जमीन पर गिरा दिया। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है।

शहीद स्मारक पर जुटे सपा कार्यकर्ता

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आह्वान के बाद, मंगलवार को आगरा के व्यस्त संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पर सपा के महिला और यूथ विंग के तमाम कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। कार्यकर्ताओं ने देश के मौजूदा हालात में संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने का हवाला देते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और उनसे तत्काल अपने पद से इस्तीफा देने की मांग उठाई गई।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची (Voter List) और निष्पक्षता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को देश के अन्य हिस्सों में भी विपक्षी दलों और सपा की तरफ से इसी तरह के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए थे।

​पुतला फूंकने को लेकर पुलिस से हुई खींचतान

प्रदर्शन के उग्र होने पर सपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला तैयार किया और उसे आग के हवाले करने की कोशिश की। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंका, वहां तैनात पुलिसकर्मी तुरंत हरकत में आ गए और उन्होंने पुतले को छीनकर दहन रोकने का प्रयास किया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पुतले को लेकर जमकर खींचतान हुई। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस छिड़ गई और देखते ही देखते पूरा प्रदर्शन स्थल अखाड़े में तब्दील हो गया, जहां पुलिसकर्मी कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे, वहीं कार्यकर्ता अपना विरोध जारी रखने पर अड़े हुए थे।

​सपा का आरोप- पुलिसकर्मी ने टांग अड़ाकर गिराया

सपा कार्यकर्ताओं का यह आरोप है कि पुतला छीनने और प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के दौरान पुलिसकर्मियों ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर उनके साथ अभद्रता की। कार्यकर्ताओं ने यहां तक आरोप लगाया कि पुलिस ने लात-घूंसों का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि इसी आपाधापी के दौरान एक पुलिसकर्मी ने सपा कार्यकर्ता की टांग में टांग अड़ा दी, जिससे वह संतुलन खोकर जमीन पर धड़ाम से गिर पड़ा। इस घटना के बाद वहां मौजूद महिला कार्यकर्ता भी बेहद आक्रोशित हो गईं और उन्होंने पुलिस के इस रवैये के खिलाफ नारेबाजी तेज कर दी। हालांकि, ये तमाम गंभीर आरोप फिलहाल सपा कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं; इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

​महिला कार्यकर्ताओं ने भी संभाला मोर्चा

पुलिस के साथ हुई तीखी नोकझोंक और खींचतान के बाद महिला कार्यकर्ताओं ने आगे आकर मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। महिला नेत्रियों ने कहा कि उनका यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए है और वे अपनी आवाज को दबाने नहीं देंगी। प्रदर्शन के दौरान “संविधान बचाओ–लोकतंत्र बचाओ” के नारों के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की गूंज से पूरा इलाका गंज उठा।

काफी देर तक बनी रही भारी तनातनी

पुतला दहन की इस कोशिश और हंगामे के बाद संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पर काफी देर तक पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच तनाव और तनातनी का माहौल बना रहा। पुलिस अधिकारी और जवान लगातार प्रदर्शनकारियों को शांत कराने और स्थिति पर काबू पाने में जुटे रहे, जबकि सपा कार्यकर्ता पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में डटे रहे।

आगरा में यह विरोध प्रदर्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का राष्ट्रव्यापी विरोध अभियान जोरों पर है। इससे पहले भी आगरा में ही ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन को लेकर विवाद सामने आ चुका है, जिसमें पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर कई लोगों की पहचान की थी।

Dr. Bhanu Pratap Singh