लखनऊ: भारत के चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद सामने आने की खबरों के बाद से देश की राजनीति में भूचाल आ गया है, और इसी का फायदा उठाते हुए विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपने कड़े निशानों पर ले लिया है।
विपक्षी दलों के नेता इस मीडिया रिपोर्ट को बतौर मुख्य आधार बनाकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं कि वे चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोटों की चोरी करवा रहे हैं और देश के लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं।
इसी सियासी घमासान के बीच समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बेहद अनोखे और कटाक्ष से भरे अंदाज में तंज कसते हुए कहा है कि लोगों ने अतीत में ‘मुँह नुचुआ’ के बारे में तो बहुत सुना था, लेकिन अब ‘चुनाव मुचुआ’ आ चुके हैं।
क्या था साल 2002 का चर्चित ‘मुँह नुचुआ’ प्रसंग?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह ‘मुँह नुचुआ’ की कहानी असल में साल 2002 की गर्मियों के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार के कई ग्रामीण व शहरी इलाकों में आग की तरह फैली एक बेहद सनसनीखेज और काल्पनिक अफवाह थी, जिसने उस वक्त आम जनता और बच्चों के दिलों-दिमाग में भारी खौफ पैदा कर दिया था। उस दौर में यह दावा किया जाता था कि रात के वक्त एक अजीबोगरीब साया या हवा में उड़ने वाली कोई रहस्यमयी चीज आती है और सोते हुए लोगों का मुंह नोचकर या खरोंचकर चली जाती है।
इसी ऐतिहासिक और खौफनाक लोक-कथा का हवाला देते हुए अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पद और उनके पहले अक्षरों को संक्षिप्त रूप (शॉर्ट-फॉर्म) में जोड़ते हुए ‘मु + चु + आ = मुचुआ’ का फॉर्मूला गढ़ा है और इसी बहाने कथित वोट चोरी के गंभीर आरोप जड़े हैं।
अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर तंज कसते हुए सपा अध्यक्ष ने लिखा, “’मुँह नुचुआ’ तो सुना था अब ‘चुनाव मुचुआ’ आ गये हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने आगे लिखा, “अब एक देश का एक मत
भ्रष्ट ‘मुचुआ’ दें त्यागपत्र! … बाक़ी मतलब समझने के लिए जेन ज़ी (Gen Z) और जागरूक हो चुकी जनता बहुत समझदार है।”
इशारों-इशारों में की मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने इस तीखे बयान में प्रत्यक्ष तौर पर किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन पूरी तरह से इशारों-इशारों में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (ज्ञानेश कुमार) को आड़े हाथों लेते हुए उनसे तत्काल अपने पद से इस्तीफा देने की मांग कर डाली है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी जोड़ा कि इस पूरी राजनीतिक और व्यंग्यात्मक बात के गहरे निहितार्थ क्या हैं, इसे समझने के लिए आज की नई पीढ़ी यानी ‘जेन ज़ी’ और देश की समझदार व जागरूक जनता पूरी तरह से सक्षम है।
इस प्रकार, चुनाव आयोग को लेकर उपजे इस ताजा विवाद और अखिलेश यादव द्वारा दिए गए इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक सियासी बयानबाजी और आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर बेहद तेज हो गया है, जो आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
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