सावधान: एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के जरिए APK फाइल भेजकर बैंक खातों पर हाथ साफ कर रहे साइबर शातिर, पुलिस और ग्रीन गैस कंपनी ने शुरू किया जागरूकता अभियान

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लखनऊ: शहर के अंदर पीएनजी उपभोक्ताओं को टारगेट करके साइबर धोखाधड़ी की वारदातें तेजी से बढ़ती जा रही हैं। शातिर ठग कभी उपभोक्ताओं का बिल बकाया होने तो कभी उनका गैस कनेक्शन बंद करने की धमकी देकर लगातार संपर्क साध रहे हैं। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते एक महीने के भीतर इस तरह के मामलों में 30 से अधिक लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके हैं और कुल मिलाकर करीब पांच करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया जा चुका है।

​बिल जमा कराने के बहाने करवाया ऐप डाउनलोड

इस तरह की ताजा घटनाओं में वृंदावन योजना के रहने वाले सेवानिवृत्त बुजुर्ग देशराज सिंह भी इस शातिर ठगी का शिकार बन गए। पुलिस के अनुसार, बीती 20 सितंबर को उनके पास एक फोन आया था। कॉल करने वाले ने खुद को ग्रीन गैस का कर्मचारी बताते हुए उनका बिल लंबित होने का झांसा दिया। इसके बाद, बकाया भुगतान करने के नाम पर उनके मोबाइल फोन में एक फर्जी ऐप डाउनलोड करवा लिया गया। जैसे ही ऐप इंस्टॉल हुआ, उसके कुछ ही पलों के भीतर उनके यूनियन बैंक खाते से छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 6.02 लाख रुपये की रकम निकल गई। इस मामले को लेकर पीजीआई थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और साइबर क्राइम सेल की मदद से आगे की जांच की जा रही है।

अपनाते हैं ठगी का यह तरीका

इस किस्म के मामलों में साइबर ठग खुद को किसी गैस कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर एसएमएस, फोन कॉल्स या फिर व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं। मीटर अपडेट करने, रुका हुआ बिल जमा कराने या फिर कनेक्शन चालू रखने का लालच व डर दिखाकर वे संदिग्ध एपीके (APK) फाइल या अज्ञात ऐप डाउनलोड करवाते हैं। इसके जरिए वे पीड़ित के मोबाइल फोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और आसानी से बैंक खाते से सारी रकम साफ कर देते हैं।

​पुलिस ने शुरू किया जागरूकता अभियान

लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद, अब साइबर क्राइम विंग और ग्रीन गैस कंपनी की ओर से आम जनता को जागरूक करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सहयोग से विभिन्न कॉलोनियों और सोसाइटियों में जाकर लोगों को इसके प्रति सावधान किया जाएगा।

पुलिस ने नागरिकों से स्पष्ट अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली फाइल या संदिग्ध लिंक पर बिल्कुल भरोसा न करें। साथ ही अपना ओटीपी, पिन या कोई भी अन्य बैंकिंग जानकारी किसी के भी साथ साझा न करें। यदि किसी के साथ ऐसी कोई संदिग्ध ठगी हो जाए, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

Dr. Bhanu Pratap Singh