उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित मशहूर कीठम झील यानी सूर सरोवर पक्षी विहार के संरक्षण के लिहाज से एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। शहर के जाने-माने पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की सुप्रीम कोर्ट में सात साल तक चली लंबी और संघर्षपूर्ण कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार इस दिशा में बड़ी जीत हासिल हुई है।
उत्तर प्रदेश वन विभाग ने सिंचाई विभाग के पास लंबित पड़ी 14.5 हेक्टेयर भूमि को भी अब सूर सरोवर पक्षी विहार का आधिकारिक हिस्सा घोषित करते हुए इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही, अलग-अलग तीन चरणों में जारी हुई अधिसूचनाओं के पूरा होने के बाद अब इस पक्षी विहार का कुल अधिसूचित दायरा बढ़कर लगभग 800 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। सबसे अहम बात यह है कि इसके आसपास पहले से तय किए गए ‘जीरो ईको सेंसिटिव जोन’ के आदेश को भी वापस ले लिया गया है, और अब यहाँ नए सिरे से ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित किया जाना है।
इस तरह परवान चढ़ी सात साल की लंबी कानूनी जंग
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने वर्ष 2019 में सूर सरोवर पक्षी विहार के विस्तृत क्षेत्र को कानूनी संरक्षण दिलाने के लिए सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया था। उनकी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सूर सरोवर पक्षी विहार का कुल क्षेत्रफल बढ़ाने का स्पष्ट आदेश दिया था। हालांकि, उस आदेश पर समय रहते अमलीजामा नहीं पहनाया गया, जिसके चलते डॉ. गुप्ता ने साल 2023 में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अदालती आदेश की अवहेलना का मुद्दा उठाया। इसके बाद माननीय न्यायालय ने इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट एम्पावर्ड कमेटी (CEC) को सौंप दिया।
कमेटी और अदालत के दबाव के बीच उत्तर प्रदेश वन विभाग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के नाम पर लगातार वक्त मांगता रहा। अंततः, विभाग ने दो चरणों में पक्षी विहार के क्षेत्रफल से जुड़े गजट नोटिफिकेशन तो जारी कर दिए, लेकिन 14.5 हेक्टेयर जमीन का मामला फिर भी अटका हुआ था।
सिंचाई विभाग से वन विभाग को ऐसे हुआ जमीन का ट्रांसफर
वह 14.5 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से सिंचाई विभाग के अंतर्गत आती थी, जिसे नियमानुसार वन विभाग को सौंपा जाना अनिवार्य था। शासन स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद यह जमीन पहले सिंचाई विभाग से जिलाधिकारी, आगरा के पास पहुंची। इसके बाद जिला प्रशासन ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए इस भूमि को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया।
ज़मीन मिलते ही वन विभाग ने तुरंत हरकत में आते हुए 14.5 हेक्टेयर के इस भूभाग को भी सूर सरोवर पक्षी विहार का अभिन्न हिस्सा घोषित करते हुए इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस प्रकार, तीन चरणों की पूरी प्रक्रिया के बाद अब कीठम झील का कुल क्षेत्रफल लगभग 800 हेक्टेयर दर्ज हो चुका है।
अब नए सिरे से तय होगा ईको सेंसिटिव जोन
डॉ. शरद गुप्ता द्वारा उठाई गई आपत्तियों और दलीलों के बाद, वन विभाग ने सूर सरोवर पक्षी विहार के लिए पहले से निर्धारित ‘जीरो ईको सेंसिटिव जोन’ के विवादास्पद आदेश को भी निरस्त कर दिया है। अब इस पूरे संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर नए सिरे से ईको सेंसिटिव जोन का निर्धारण किया जाएगा।
जानकारों के अनुसार, किसी भी संरक्षित वन्यजीव या पक्षी विहार क्षेत्र के आसपास एक किलोमीटर से लेकर अधिकतम 10 किलोमीटर तक के दायरे को ईको सेंसिटिव जोन के रूप में घोषित किया जा सकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ईको सेंसिटिव जोन के लिए कम से कम एक किलोमीटर की परिधि को अनिवार्य माना है। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश वन विभाग को कीठम झील और सूर सरोवर पक्षी विहार की सीमाओं के इर्द-गिर्द नए मानदंडों के तहत ईको सेंसिटिव जोन तय करना ही होगा।
व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों पर मंडराया सीलिंग का खतरा
नया ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित होने के बाद इसके दायरे में आने वाली हर तरह की कमर्शियल और अन्य गतिविधियों पर नियमानुसार कड़े प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। वर्तमान स्थिति यह है कि कीठम झील और सूर सरोवर पक्षी विहार के पास बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इनमें कई शिक्षण संस्थान, उद्योग, ऑटोमोबाइल शोरूम और कंक्रीट मिक्सचर प्लांट तक शामिल हैं।
इसके अलावा, आसपास के खेतों में बड़े स्तर पर बिना अनुमति के धड़ल्ले से आवासीय कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। जैसे ही नया ईको सेंसिटिव जोन लागू होगा, इन सभी अवैध व अनधिकृत गतिविधियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। नियमों के दायरे में न आने वाली इन व्यावसायिक इकाइयों और निर्माणों पर सील लगाने तक की बड़ी कार्रवाई का तलवार अब इन पर लटकने लगी है।
सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल बढ़ने और इस 14.5 हेक्टेयर महत्वपूर्ण भूमि के जुड़ जाने से इसके संरक्षण का एक बहुत बड़ा पड़ाव पूरा हो गया है। अब तमाम पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों की निगाहें नए ईको सेंसिटिव जोन के अंतिम निर्धारण पर टिकी हुई हैं, जिसके तय होने के बाद ही कीठम झील के आसपास चल रही तमाम गतिविधियों के भविष्य की वास्तविक तस्वीर साफ हो पाएगी।
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