​‘देखिए सर, तमंचा लोड तो नहीं है…’– कैमरे के सामने आगरा पुलिस के फिल्मी अंदाज ने सोशल मीडिया पर बटोरी सुर्खियां, अवैध हथियार के साथ पकड़े गए आरोपी का ड्रामाई वीडियो चर्चा में

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आगरा के एत्मादपुर थाना क्षेत्र से सामने आए एक सनसनीखेज मामले में, पुलिस द्वारा अवैध हथियार बरामदगी के बाद अपनी पीठ थपथपाने की उम्मीदें उस समय धरी रह गईं, जब इस पूरी कार्रवाई का 26 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। पुलिस महकमे के लिए यह वीडियो अब वाहवाही का नहीं, बल्कि भारी किरकिरी और सोशल मीडिया पर फजीहत का सबब बन चुका है।

आरोपी को दबोचने से लेकर उसकी पैंट की जेब से तमंचा बरामद करने तक का तरीका इतना नाटकीय और बनावटी था कि इंटरनेट यूजर्स ने इसे पुलिसिया कार्रवाई मानने से इनकार कर दिया। लोगों ने इसे किसी कम बजट की फिल्म का सीन या इंस्टाग्राम रील की शूटिंग करार देते हुए जमकर आड़े हाथों लिया।

यह पूरा वाकया एत्मादपुर थाना क्षेत्र का है, जहां दो दिन पहले पुलिस ने मुखबिर की खास सूचना के आधार पर गांव वास वाला स्थित प्राइमरी स्कूल के पास से एक संदिग्ध युवक को धर दबोचा था। पुलिस के दावों के मुताबिक, पकड़े गए शख्स के पास से .315 बोर का एक अवैध तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। फौरन कानूनी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया और उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया। लेकिन सोमवार को जैसे ही इस गिरफ्तारी का अंदरूनी और फिल्मी अंदाज वाला वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुआ, मामला स्थानीय चर्चा से निकलकर इंटरनेट पर वायरल सनसनी बन गया।

घटना के वायरल क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि गांव के खुले चौक के बीचोंबीच दो पुलिसकर्मी पहले से ही एक संदिग्ध युवक को दबोचे हुए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी को दरोगा पार्थ सारथी और सिपाही विनोद कुमार ने काबू में कर रखा था। इसी बीच, कैमरे के फ्रेम में एक अन्य दरोगा रामपूत गौतम की एकदम ‘सिनेमैटिक एंट्री’ होती है।

वीडियो में आगे नजर आता है कि कैमरे की निगाहों के सामने ही आरोपी की टी-शर्ट को ऊपर उठाया जाता है और उसकी जींस से तमंचा बाहर निकाला जाता है। इसके बाद, बरामद किए गए तमंचे को हाथ में लहराते हुए सीधे कैमरे की तरफ देखने का जो एंगल दिखाया गया, उसने देखने वाले हर शख्स को हैरान कर दिया। इस बनावटी और तड़क-भड़क वाले प्रस्तुतिकरण को देखकर यूजर्स तुरंत समझ गए कि यह कोई सामान्य रूटीन पुलिस चेकिंग नहीं, बल्कि कैमरे के लिए शूट किया गया ड्रामा था।

सामने आए इस छोटे से वीडियो क्लिप में एक शख्स की आवाज भी साफ सुनाई देती है, जो यह कहता हुआ सुनाई दे रहा है कि .315 बोर का अवैध तमंचा बरामद कर लिया गया है। इसके तुरंत बाद वह सहकर्मी से पूछता है कि, “देखिए सर, कहीं तमंचा लोड तो नहीं है।” वीडियो के अगले क्रम में आरोपी की तलाशी का सिलसिला जारी रहता है और पुलिसकर्मी उसकी जींस की पिछली पॉकेट से दो कारतूस बरामद होने का दृश्य भी कैमरे में कैद करवाते हैं।

इस पूरी रिकॉर्डिंग के दौरान आसपास ग्रामीण जनता और तमाशबीनों की अच्छी खासी भीड़ भी मुस्तैद दिखाई दे रही है। खुले आसमान के नीचे और आम जनता की मौजूदगी के बीच पुलिस का इस तरह से कैमरे के आगे पोज देकर कार्रवाई करना इस वीडियो के वायरल होने की सबसे बड़ी वजह बन गया।

पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, एत्मादपुर थाने की टीम ने मुखबिर के जरिए मिली पुख्ता खबर पर कार्रवाई करते हुए गांव वास वाला में प्राइमरी स्कूल के पास से दीपू उर्फ देवेश को गिरफ्तार किया था, जो कि कस्बा सत्ता मोहल्ला का रहने वाला बताया गया है। पुलिस ने अपनी शुरुआती प्रेस विज्ञप्ति और दावों में उसके पास से एक अवैध तमंचा और कारतूस मिलने की बात कही थी, जिसके आधार पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

शुरुआती घंटों तक यह मामला एक साधारण गुडवर्क की तरह ही था, लेकिन जैसे ही गिरफ्तारी की प्रक्रिया को कैमरे पर फिल्माने वाला वीडियो इंटरनेट पर सार्वजनिक हुआ, पुलिस की कामयाबी पर उसका यह अनोखा और नाटकीय प्रस्तुतिकरण भारी पड़ गया।

सूत्रों के मुताबिक, इस वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के पीछे पुलिस का मुख्य मकसद अपनी पीठ थपथपाना और जनता के बीच अपनी सक्रियता का डंका बजाना था। पुलिस का शायद यह मानना ​​था कि इस तरह की बरामदगी से जनता में कानून का खौफ बढ़ेगा और महकमे की साख मजबूत होगी। लेकिन यह दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया और वीडियो का ट्रीटमेंट सोशल मीडिया की जनता को बिल्कुल भी नहीं भाया।

कई एक्स (ट्विटर) और फेसबुक यूजर्स ने पुलिसकर्मियों के मौके पर पहुंचने के अंदाज, आरोपी को पकड़ने की बॉडी लैंग्वेज और तमंचा हवा में लहराकर सीधे कैमरे की ओर देखकर पोज देने की स्टाइल पर जमकर तंज कसे।

वीडियो के इंटरनेट पर आने के बाद से ही उस पर मजेदार और तीखी प्रतिक्रियाओं का सैलाब आ गया है। एक सोशल मीडिया यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा कि, “डायरेक्शन और स्क्रिप्ट तो ठीक-ठाक है, लेकिन कलाकारों की एक्टिंग में अभी भी सुधार की गुंजाइश है।” वहीं एक अन्य यूजर ने तंज कसा कि, “अब लगता है उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों को भी इंस्टाग्राम रील्स बनाने का भयंकर चस्का लग चुका है।” इसके अलावा तमाम अन्य यूजर्स ने भी इस घटना को पुलिसई कार्यशैली की बजाय कोई सस्ती फिल्मी स्क्रिप्ट या ड्रामा बताकर खूब मजे लिए, जिससे महकमे की काफी फजीहत हुई।

इस पूरे प्रकरण में एक अपराधी का अवैध हथियार के साथ पकड़ा जाना और सलाखों के पीछे पहुंचना असल पुलिस कार्रवाई का सबसे अहम और ठोस पहलू है, लेकिन वर्तमान में सोशल मीडिया पर बहस उस गिरफ्तारी से ज्यादा उस वीडियो को शूट करने और परोसने के तरीके को लेकर छिड़ी हुई है।

महज़ 26 सेकंड के इस छोटे से वीडियो क्लिप ने एक बार फिर इस गंभीर बहस को जन्म दे दिया है कि आधुनिक दौर में पुलिस की जमीनी कार्रवाइयों को कैमरों के सामने किस मर्यादा और पेशेवर तरीके से पेश किया जाना चाहिए।

आज के इस डिजिटल और सोशल मीडिया के युग में जहां कोई भी विजुअल कुछ ही मिनटों के भीतर लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच जाता है, वहां अपनी वाहवाही बटोरने का यह अति-फिल्मी और ड्रामेबाज तरीका तारीफ दिलाने के बजाय पुलिस विभाग के लिए भारी ट्रोलिंग और तीखी आलोचना की मुख्य वजह बन गया है।

Dr. Bhanu Pratap Singh