मुंबई (अनिल बेदाग): हिंदी फिल्म उद्योग यानी बॉलीवुड में पुलिस की खाकी वर्दी पारंपरिक रूप से लंबे समय तक केवल पुरुष नायक-किरदारों की ही पहचान मानी जाती रही है। परंतु समय के साथ कई प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों ने ऑन-स्क्रीन खाकी पहनकर इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया और यह साबित कर दिखाया कि बड़े परदे पर एक दमदार और असरदार पुलिस अधिकारी के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए केवल भारी-भरकम एक्शन की ही नहीं, बल्कि गजब के आत्मविश्वास और अभिनय की गहरी गहराई की भी उतनी ही जरूरत होती है।
मशहूर अभिनेत्री रानी मुखर्जी से लेकर ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा तक, ऐसी कई अभिनेत्रियों ने अपने शानदार अभिनय के दम पर अलग-अलग फिल्मों में पुलिस के किरदारों को हमेशा-हमेशा के लिए अमर और यादगार बना दिया है।
इस कड़ी में सबसे पहले बात करते हैं रानी मुखर्जी की, जिन्होंने फिल्म ‘मर्दानी’ में सीनियर इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी रॉय के चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाकर एक निडर और बेबाक क्राइम ब्रांच अधिकारी की भूमिका को बिल्कुल नई और अनूठी पहचान दी। मासूम बच्चों की अवैध तस्करी के घृणित कारोबार के खिलाफ उनकी यह कड़क लड़ाई इस पूरे किरदार को बेहद प्रभावशाली बना देती है। फिल्म में शिवानी रॉय की सख्ती के भीतर एक तरफ जहां ममता से भरी मां का जज़्बा नजर आता है, वहीं दूसरी तरफ एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी का अदम्य साहस भी साफ झलकता है।
इसी तरह, अभिनेत्री अदा शर्मा ने फिल्म ‘कमांडो’ और ‘बस्तर’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय के दो बिल्कुल अलग आयाम पेश किए हैं। ‘कमांडो’ फ्रेंचाइजी में इंस्पेक्टर भावना रेड्डी के रूप में उनका बेहद बेबाक, चुस्त और एक्शन से भरपूर अंदाज दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया था। वहीं दूसरी तरफ, फिल्म ‘बस्तर: द नक्सल स्टोरी’ में एक गंभीर आईपीएस अधिकारी नीरजा माधवन के रूप में उन्होंने बेहद संजीदा, गहरा और ग्रिट्टी अवतार परदे पर उतारा। यह वाकई तारीफ की बात है कि कैसे एक ही अभिनेत्री ने पुलिस के किरदार के दो इतने अलग और विपरीत रंगों को इतनी खूबी के साथ पर्दे पर जीवंत कर दिखाया।
हास्य और व्यंग्य के अनूठे तड़के के साथ पुलिस की भूमिका को पेश करने का श्रेय प्रतिभाशाली अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा को जाता है, जिन्होंने फिल्म ‘कटहल’ में महिमा बसोर का किरदार निभाया। इस फिल्म में कटहल चोरी जैसी एक असामान्य और अनोखी जांच के इर्द-गिर्द घूमती कहानी के जरिए उनका यह किरदार समाज की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीति पर भी तीखे सवाल खड़े करता है।
अपने संजीदा अभिनय के लिए मशहूर अभिनेत्री तब्बू ने फिल्म ‘दृश्यम’ में आईजी मीरा देशमुख का ऐसा किरदार निभाया, जिसमें उन्होंने बिना किसी खास या भारी-भरकम एक्शन के केवल अपने मजबूत व्यक्तित्व और नियंत्रित तीव्रता (कंट्रोल इंटेंसिटी) के दम पर दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। फिल्म में उनकी यह खूबी भी काफी सराही गई कि उनकी खामोशी और आंखें भी पूछताछ के दौरान किसी सख्त पुलिस अधिकारी जितनी ही असरदार महसूस होती थीं।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकीं अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म ‘जय गंगाजल’ में एसपी आभा माथुर की भूमिका में भ्रष्टाचार और अपराध से अकेले दम पर जूझती एक बेहद दृढ़ और उसूलपसंद अधिकारी का किरदार निभाया। इसके साथ ही, मशहूर ‘डॉन’ फ्रेंचाइज़ी में रोमा के रूप में उनका यह रूप नजर आया जहां उनका तेवर और अंदाज कहीं अधिक एक्शन-ओरिएंटेड और आक्रामक रहा था।
इन तमाम दिग्गज अभिनेत्रियों ने अपने शानदार और सशक्त अभिनय के जरिए यह साबित कर दिया है कि खाकी महज शरीर पर पहनी जाने वाली कोई साधारण वर्दी भर नहीं होती, बल्कि यह परदे पर किसी किरदार की असली ताकत, आंतरिक क्षमता और उसके बुलंद आत्मविश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक बन सकती है।
-up18News
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