पिनाहट (आगरा)। चंबल नदी के पिनाहट और उसेथ घाट पर रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार के दौरान स्टीमर का संचालन न होने के कारण उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़े सैकड़ों ग्रामीणों और यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्टीमर संचालन की अनुमति मिलने के बावजूद मध्य प्रदेश प्रशासन द्वारा स्टीमर का संचालन शुरू न किए जाने से नाराज होकर अंबाह (मुरैना) के कांग्रेस नेता शेरा तोमर ने चंबल नदी में कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। हालांकि, मौके पर मौजूद सूझबूझ भरे युवाओं ने तुरंत नदी में छलांग लगाकर उनकी जान बचा ली। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिनाहट और उसेथ घाट के बीच चंबल नदी पर स्टीमर का संचालन लंबे समय से दोनों राज्यों की सीमा पर बसे गांवों के लोगों के लिए आवागमन का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण साधन रहा है। रक्षाबंधन के पर्व पर बड़ी संख्या में बहनें और लोग अपने रिश्तेदारों के यहां आने-जाने के लिए इसी जलमार्ग का उपयोग करते हैं। लेकिन स्टीमर का संचालन बंद रहने से दोनों तरफ के सैकड़ों लोगों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्टीमर चलाने की अनुमति मिलने के बाद भी मध्य प्रदेश प्रशासन की तरफ से संचालन शुरू नहीं कराया गया, जिसके कारण त्योहार के दिन नदी पार करने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों में इसे लेकर पहले से ही काफी रोष था।
इसी बीच, स्टीमर संचालन शुरू न होने से बेहद नाराज कांग्रेस नेता शेरा तोमर घाट पर पहुंच गए। उन्होंने प्रशासन के इस रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए हंगामा किया।
बताया जा रहा है कि तत्काल स्टीमर संचालन शुरू कराने की मांग को लेकर बढ़ते आक्रोश के चलते उन्होंने चंबल नदी में छलांग लगा दी। उनके नदी में कूदते ही वहां मौजूद युवाओं में अफरा-तफरी मच गई। युवाओं ने बिना देर किए नदी में कूदकर कांग्रेस नेता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान मध्य प्रदेश की महुआ पुलिस भी मौके पर मौजूद थी।
घटना के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा वीडियो बनाए जाने का मामला भी सामने आया है। वायरल वीडियो में कांग्रेस नेता को युवाओं द्वारा बचाए जाने और वहां मौजूद लोगों की गहमागहमी साफ दिखाई दे रही है। इस घटना के बाद घाट पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेता के विरोध तथा हंगामे के बावजूद आखिरकार स्टीमर का संचालन शुरू नहीं हो सका, जिससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और अधिक बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि चंबल नदी के दोनों किनारों पर बसे गांवों के लिए स्टीमर केवल आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जरूरत है। त्योहार के वक्त इसका संचालन बंद रहने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि पिनाहट और उसेथ घाट के बीच स्टीमर का संचालन नियमित रूप से किया जाए, ताकि चंबल के दोनों किनारों के बाशिंदों को बार-बार इस समस्या से न जूझना पड़े। साथ ही, रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहारों पर विशेष व्यवस्था करने की भी मांग की गई है। इस घटना के बाद चंबल घाट क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था और सुस्ती को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्टर,-नीरज परिहार
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