आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए साफ कर दिया है कि अब कोई भी परियोजना केवल कागजी प्रस्तावों के आधार पर मंजूर नहीं होगी। प्रत्येक योजना का पहले जमीनी सत्यापन कराया जाएगा, उसकी उपयोगिता, जनहित और ऐतिहासिक महत्व का आकलन किया जाएगा, उसके बाद ही अंतिम स्वीकृति दी जाएगी।
सर्किट हाउस सभागार में आयोजित पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता के धन का उपयोग केवल उन्हीं परियोजनाओं पर किया जाए, जिनका लाभ सीधे आम लोगों और पर्यटकों तक पहुंचे।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह, विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह, डॉ. जी.एस. धर्मेश, पुरुषोत्तम खंडेलवाल, चौधरी बाबूलाल, भगवान सिंह कुशवाह, राष्ट्रीय लोकदल जिलाध्यक्ष गोविंद शर्मा, मंडलायुक्त नगेन्द्र प्रताप, जिलाधिकारी मनीष बंसल, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
80 परियोजनाओं की समीक्षा, प्रदेश के सभी 18 मंडलों में चलेगा अभियान
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की कार्ययोजना की प्रदेशव्यापी समीक्षा शुरू कर दी गई है। पहले चरण में आगरा और अलीगढ़ मंडल की परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया है। दोनों मंडलों की कुल 80 परियोजनाओं का बिंदुवार परीक्षण किया गया। इनमें परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता, लागत और जनहित का आकलन किया गया। अब यही प्रक्रिया प्रदेश के सभी 18 मंडलों में लागू होगी, जहां समीक्षा बैठकों के साथ स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा।
पर्यटन परियोजनाएं और धर्मार्थ योजनाएं समीक्षा के दायरे में
बैठक में आगरा मंडल की 58 पर्यटन परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिनकी अनुमानित लागत करीब 273 करोड़ रुपये है। इसके अलावा धर्मार्थ कार्य विभाग और तीर्थ विकास परिषद की लगभग 245 करोड़ रुपये लागत वाली तीन बड़ी परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इनमें 15 धार्मिक स्थलों का संरक्षण एवं विकास, श्री बांके बिहारी जी महाराज कॉरिडोर और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जनसुविधाओं का विस्तार शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि बांके बिहारी कॉरिडोर का मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
मंत्री का सख्त एक्शन प्लान: बिना प्रमाण और जांच नहीं मिलेगी मंजूरी
बैठक में मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर परियोजना के लिए भूमि अभिलेख अनिवार्य होंगे। स्थल के नवीनतम फोटोग्राफ प्रस्तुत करने होंगे। लागत का व्यावहारिक आकलन किया जाएगा। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के प्रमाण देने होंगे। स्थानीय लोगों और पर्यटकों को होने वाले लाभ का विवरण देना होगा। संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्था की जवाबदेही पहले से तय होगी। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। सभी लंबित परियोजनाओं को हर हाल में नवंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रमों में सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया। मंत्री ने कहा कि परियोजनाओं का चयन केवल फाइलों के आधार पर नहीं बल्कि वास्तविक आवश्यकता और जनहित को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
आगरा के मंदिरों और धार्मिक स्थलों के लिए बड़े प्रस्ताव
विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने खंदौली के ग्राम रामनगर स्थित लाल मंदिर में बहुउद्देशीय हॉल, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल सुविधा, सुलभ प्रसाधन, क्यूआर कोड युक्त साइनेज, यात्री बेंच, लैंडस्केपिंग जैसे कार्यों के लिए 140 लाख रुपये का प्रस्ताव रखा। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने दयालबाग स्थित श्री बालाजी धाम मंदिर में इसी प्रकार की सुविधाओं के लिए 1.40 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तुत की। विधायक भगवान सिंह कुशवाह ने सैंया ब्लॉक के वृथला गांव स्थित श्री लीला विलास मंदिर के लिए बहुउद्देशीय हॉल और अन्य सुविधाओं के निर्माण का प्रस्ताव दिया।
केंद्रीय मंत्री बेबी रानी मौर्य के विधानसभा क्षेत्र आगरा ग्रामीण के अकोला स्थित घासी बाबा मंदिर में पर्यटन सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव रखा गया। कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के विधानसभा क्षेत्र आगरा दक्षिण के शीतला गली स्थित प्राचीन कुटुंबी भैरोंनाथ मंदिर के लिए भी 140 लाख रुपये की परियोजना प्रस्तावित हुई।
विधायक डॉ. जी.एस. धर्मेश ने डिफेंस एस्टेट फेज-1 स्थित दुर्गा मंदिर में बहुउद्देशीय हॉल, शौचालय, पेयजल और सौंदर्यीकरण कार्यों का प्रस्ताव दिया। विधायक चौधरी बाबूलाल ने अछनेरा के किरावली स्थित मौनी बाबा मंदिर के लिए 1.40 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तुत की। एमएलसी विजय शिवहरे ने जयपुर हाउस स्थित श्री चिंताहरण महादेव मंदिर परिसर में हॉल निर्माण, बाउंड्री वॉल, फर्श और रंगाई-पुताई, गर्भगृह का चौड़ीकरण, प्रवेश द्वार, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, समरसेबल और आरओ,पार्क का सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्ताव रखा।
बटेश्वर धाम, अटल स्मारक और कोठी मीना बाजार पर विशेष फोकस
विधायक रानी पक्षालिका सिंह ने बाह क्षेत्र स्थित बटेश्वर धाम के प्राचीन मंदिरों के हेरिटेज संरक्षण के लिए लगभग 12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा बटेश्वर धाम में पार्किंग और पर्यटन सुविधाओं का निर्माण, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मारक पर कियोस्क और पर्यटक सुविधाएं, कोठी मीना बाजार का पुनरोद्धार और सौंदर्यीकरण, खेरागढ़ के भिलावली स्थित हनुमान मंदिर का विकास और फतेहाबाद के भटाकी पीपरी मेवली खुर्द स्थित शिव मंदिर के लिए 1.40 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया।
फिरोजाबाद और मैनपुरी की योजनाओं पर भी चर्चा
बैठक में फिरोजाबाद के लिए आर्य संस्कृति संकुल, बाबा नीब करौरी संग्रहालय के दूसरे चरण, जिला सीमाओं पर पर्यटन सूचना केंद्र और महुआ वाली कालिका माता मंदिर में सुविधाओं का विस्तार का प्रस्ताव रखा गया। वहीं मैनपुरी में शीतला माता मंदिर, राम जानकी मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के प्रस्ताव रखे गए।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी पर जोर
मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास कार्यों में सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से जानकारी दी जाए। साथ ही, शिलान्यास और भूमि पूजन जैसे कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी लंबित अभिलेख, तकनीकी दस्तावेज और भूमि संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही अंतिम कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए।
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