आगरा में मानसून का ‘ट्रायल’ फेल: बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, सड़कों पर भरा दो फीट पानी

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आगरा: मंगलवार शाम से शुरू हुई बारिश ने बुधवार सुबह तक शहर की फिजाओं को तो खुशनुमा बना दिया, लेकिन यह राहत अपने साथ प्रशासनिक अव्यवस्थाओं की भारी चुनौती भी लेकर आई। रुक-रुक कर हुई इस बारिश ने नगर निगम के मानसून-पूर्व तैयारियों के दावों और निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली की पोल खोल कर रख दी है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसने जिला प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

शहर की 30 से अधिक कॉलोनियां जलमग्न

पहली प्रभावी बारिश ने ही यह साबित कर दिया कि नगर निगम का नाला सफाई अभियान कागजों तक ही सीमित रहा। शहर के 30 से अधिक इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। वीआईपी रूट मानी जाने वाली ‘खेरिया मोड़-अजीत नगर गेट रोड’ पर तो स्थिति और भी भयावह थी, जहाँ लगभग दो फीट पानी जमा हो गया। इस जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों को भारी मशक्कत करनी पड़ी और बीच रास्ते में ही कई गाड़ियां बंद हो गईं। अलबतिया रोड, पृथ्वीनाथ फाटक, 100 फीट रोड, मानस नगर, एमजी रोड और रामबाग जैसे प्रमुख इलाकों में बारिश थमने के चार घंटे बाद तक सड़कों पर पानी जमा रहा।

सीएम ग्रिड योजना बनी मुसीबत का सबब

शहर में चल रही ‘सीएम ग्रिड योजना’ के अधूरे निर्माण कार्यों ने स्थिति को और विकट बना दिया है। दिल्ली गेट, कालिंदी विहार, इंद्रापुरम और कोठी मीना बाजार-मारुति एस्टेट रोड पर चल रही खुदाई के कारण सड़कें पहले ही संकरी हो चुकी थीं, और अब बारिश ने वहां कीचड़, गहरे गड्ढों और धंसी हुई सड़कों का जाल बिछा दिया है। गौरतलब है कि जिलाधिकारी मनीष बंसल ने हाल ही में समीक्षा बैठक में अधिकारियों और ठेकेदारों को कड़ी फटकार लगाई थी, बावजूद इसके जमीनी हकीकत में कोई सुधार नहीं दिखा।

410 नालों की सफाई के दावे हुए फेल

नगर निगम ने 15 जून तक शहर के सभी 410 नालों (18 बड़े, 151 मझोले और 241 छोटे) की सफाई पूर्ण करने का दावा किया था। हालांकि, पहली बारिश में ही हुई जलभराव की समस्या ने इन दावों की कलई खोल दी है।

तापमान में बदलाव और कृषि पर प्रभाव

बारिश के चलते शहर के तापमान में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अधिकतम तापमान में 5.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई। वहीं, कृषि के लिहाज से स्थिति चिंताजनक है। इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से लगभग 45 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिसका सीधा असर आगरा की खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ रहा है। हालांकि, 8 से 10 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना से किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

अब बड़ा सवाल यह है कि यदि हल्की और रुक-रुक कर हुई बारिश में शहर का यह हाल है, तो आने वाले 48 घंटों में होने वाली संभावित भारी बारिश के दौरान आगरा की सड़कें और नाले प्रशासन के लिए कितनी बड़ी परीक्षा साबित होंगे। यह समय अधिकारियों के लिए दावों से आगे बढ़कर धरातल पर काम करने का है।

Dr. Bhanu Pratap Singh