अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने सवाल किया है कि जो दल राम के नाम पर राजनीति करता है, वह आज राम मंदिर ट्रस्ट पर उठ रहे सवालों पर चुप्पी क्यों साधे हुए है?
यूपी कांग्रेस ने अपने पोस्ट में कहा, “राम के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा आज राम मंदिर ट्रस्ट पर उठ रहे सवालों पर आखिर खामोश क्यों है?” पार्टी का आरोप है कि एसआईटी (SIT) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों—चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव—के रिश्तेदार मंदिर के विभिन्न व्यवस्थागत कार्यों में बेहद प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे। कांग्रेस ने जमीन खरीद के दौरान सर्किल रेट से कई गुना अधिक कीमत चुकाने और निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
’आस्था का निजीकरण बर्दाश्त नहीं’: कांग्रेस
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों ने राम मंदिर को अपनी अटूट श्रद्धा का केंद्र माना है। पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर इस पवित्र श्रद्धा को कुछ लोगों ने अपनी निजी व्यवस्था और रिश्तेदारी के नेटवर्क में तब्दील कर दिया है, तो इसकी जवाबदेही निश्चित रूप से तय होनी चाहिए।
कांग्रेस ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह प्रश्न केवल ट्रस्ट का नहीं है, बल्कि उन लोगों की नैतिकता का भी है जिन्होंने राम मंदिर के नाम पर ईमानदारी की राजनीति का दावा किया था। पार्टी ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या अब देश को इस मामले पर जवाब मिलेगा, या फिर हमेशा की तरह आस्था के नाम पर उठाए गए हर सवाल को दबाने की कोशिश जारी रहेगी?
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