आगरा। कृषि विज्ञान केंद्र, बिचपुरी में आयोजित ‘किसान दिवस एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला’ उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई जब किसानों ने एक जनप्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाए। किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा किसान नेताओं को जेल भेजने की धमकी दी गई, जिससे आक्रोशित किसान प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी की गाड़ी के आगे धरने पर बैठ गए। काफी देर तक चले इस तनावपूर्ण गतिरोध के बाद मंत्री के ठोस आश्वासन पर किसानों ने अपना विरोध समाप्त किया।
किसानों ने रखी अपनी पीड़ा
कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत किसानों की समस्याओं पर चर्चा होनी थी, लेकिन आक्रोशित किसानों ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आलू किसानों के आर्थिक संकट पर बोलते हुए श्याम सिंह चाहर ने कहा कि आलू की गिरती कीमतों (6-8 रुपये प्रति किलो) के कारण किसान बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार कोल्ड स्टोरेज का 250 रुपये प्रति कुंतल भाड़ा सीधे किसानों के खाते में दे, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
मुआवजा और एडीए पर गंभीर आरोप
किसान नेता लाखन सिंह त्यागी ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इनर रिंग रोड लैंड पार्सल योजना के लिए 16 साल पहले जमीनें अधिग्रहित की गईं, लेकिन न तो उचित मुआवजा मिला और न ही जमीन वापस हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि खतौनी से किसानों के नाम हटाने जैसे कृत्य किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर उत्पीड़न है।
मंत्री का आश्वासन और स्थिति का समाधान
विरोध प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया ने हस्तक्षेप किया और किसानों की सीधी वार्ता प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से कराई। मंत्री ने किसानों को धैर्य रखने की सलाह देते हुए आश्वासन दिया कि उनके अगले आगरा दौरे पर एक विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इन समस्याओं का त्वरित समाधान निकाला जाएगा। मंत्री के इस आश्वासन के बाद किसान शांत हुए।
अधिकारों के लिए लामबंद हुए किसान
इस प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन और अन्य संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे। किसान नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव से डरने वाले नहीं हैं और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगे।
धरना-प्रदर्शन के दौरान पुष्पेंद्र चौधरी, सोमवीर यादव, लक्ष्मी नारायण बघेल समेत गंभीर सिंह, गोपाल शर्मा, सुरेंद्र कुमार, जगदीश, सत्यवीर और अजय कुमार सहित भारी संख्या में किसान उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शासन-प्रशासन से संवेदनशीलता बरतने की मांग की है।
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