आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों के विरुद्ध शनिवार को कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा प्रदर्शन किया। सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनेंद्र जादौन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कॉलेज संचालक विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे, जहाँ उन्होंने अल्पकालीन धरना दिया और रजिस्ट्रार को नौ सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।
इस दौरान संचालकों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की कई नीतियां स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों और विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रही हैं, जिन्हें तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया कि अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के विषय विस्तारण शुल्क पर लगाई गई पेनल्टी को घटाकर केवल 15 हजार रुपये प्रति महाविद्यालय किया जाए, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों पर लगाई गई पेनल्टी पूरी तरह समाप्त की जाए। एसोसिएशन का कहना है कि इस विषय पर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ दो बार हुई वार्ता में सहमति भी बन चुकी है, इसलिए अब इसे लागू किया जाना चाहिए।
कॉलेज संचालकों ने कहा कि विश्वविद्यालय की वेब पंजीकरण प्रक्रिया में सभी संबद्ध महाविद्यालयों के नाम अंकित किए जाएं, ताकि छात्र-छात्राएं अपनी सुविधा और निकटता के अनुसार महाविद्यालय का चयन कर सकें। वर्तमान व्यवस्था से विद्यार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में विश्वविद्यालय द्वारा वेब पंजीकरण के नाम पर लिए जा रहे 400 रुपये के शुल्क को अनुचित बताया गया। संचालकों का कहना है कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय मात्र 200 रुपये शुल्क ले रहा है, इसलिए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय भी उसी के अनुरूप शुल्क निर्धारित करे।
एसोसिएशन ने कहा कि आगामी बीएड, बीएससी एग्रीकल्चर और एलएलबी की प्रायोगिक परीक्षाओं में एक परीक्षक स्ववित्तपोषित महाविद्यालय से तथा दूसरा स्थानीय जनपद से नियुक्त किया जाए। बाहर से आने वाले परीक्षक टैक्सी किराया, भोजन और अन्य मदों के नाम पर कॉलेज संचालकों तथा विद्यार्थियों से अनैतिक आर्थिक मांग करते हैं, जिससे आर्थिक शोषण होता है।
ज्ञापन में बीएड, बीएससी एग्रीकल्चर और एलएलबी सहित सभी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर प्रणाली समाप्त कर वर्षवार परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की गई। एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश के कई विश्वविद्यालय पहले ही वर्षवार परीक्षा प्रणाली अपना चुके हैं।
संचालकों ने कहा कि विश्वविद्यालय परीक्षा शुल्क पहले ही विद्यार्थियों से जमा करा लेता है। उसी प्रकार परीक्षा आयोजन में आने वाले श्रमिक शुल्क एवं अन्य व्यय भी छात्र संख्या के अनुपात में परीक्षा से पूर्व संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाएं। पूर्व में यह व्यवस्था लागू थी, जिसे पुनः प्रभावी किया जाए।
एसोसिएशन ने मांग की कि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में होने वाली परीक्षाओं के लिए नोडल केंद्र से प्रश्नपत्र एवं उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की पूर्व व्यवस्था फिर से लागू की जाए, ताकि परीक्षाओं की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित रह सके।
बीएड, बीएससी एग्रीकल्चर और एलएलबी की प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान परीक्षक नियुक्ति के लिए स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से अनुमोदित शिक्षकों की नियुक्ति, अनुमोदन पत्र और बैंक स्टेटमेंट दोबारा मांगे जाने पर भी एसोसिएशन ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि सभी शिक्षकों का पूरा विवरण विश्वविद्यालय के संबद्धता विभाग में पहले से उपलब्ध है, इसलिए अनावश्यक दस्तावेज मांगने की प्रक्रिया समाप्त की जाए।
ज्ञापन में बीएड सहित अन्य लंबित पाठ्यक्रमों की डिग्रियां हेल्प डेस्क के माध्यम से समय पर महाविद्यालयों को उपलब्ध कराने की भी मांग की गई, ताकि विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
कॉलेज संचालकों ने बताया कि ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री को भी प्रेषित की गई है, ताकि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की समस्याओं पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके।
अल्पकालीन धरना एवं ज्ञापन कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनेंद्र जादौन के अलावा मुकेश शर्मा, डॉ. बी. के. शर्मा, लाल सिंह राघव, राजवीर सिंह, मोहित सिंह, मोहित यादव, रविंद्र सिंह, राजकुमार शर्मा, केशव सिंह, राजेंद्र कुमार, आनंद कुमार, अरविंद कुमार त्यागी, शैलेंद्र सिंह, संजीव चौहान, युवराज परिहार, रंजीत सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के संचालक उपस्थित रहे।
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