फर्जी बिजली बिल और बोगस आईटीसी का जाल: आगरा में पकड़ा गया करोड़ों का जीएसटी फर्जीवाड़ा, संगठित गिरोह की तलाश में जुटी पुलिस

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आगरा: ताजनगरी में फर्जी जीएसटी पंजीकरण के जरिए सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लगाने वाले एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। राज्य कर विभाग की गहन जांच में सामने आया है कि ‘धर्मेंद्र ट्रेडर्स’ नामक एक कागजी फर्म का उपयोग कर लगभग 78.81 लाख रुपये की कर चोरी की गई है। इस गंभीर वित्तीय अपराध के सामने आने के बाद विभाग की शिकायत पर थाना लोहामंडी में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस और कर विभाग अब इस पूरे रैकेट की जड़ें खोजने में जुटे हैं।

​संजय प्लेस के पते पर अस्तित्व ही नहीं

जांच का केंद्र संजय प्लेस स्थित एक पता था, जहाँ ‘धर्मेंद्र ट्रेडर्स’ नामक फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया गया था। जब विभाग की टीम ने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए इस पते पर दबिश दी, तो वहां फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला। न तो वहां कोई कार्यालय था और न ही किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही थी। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने भी फर्म या उसके संचालक से अनभिज्ञता जताई।

फर्जीवाड़े की परतें: बिजली बिल से मोबाइल नंबर तक झोल

विभागीय अधिकारियों ने जब फर्म के दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच की, तो एक के बाद एक फर्जीवाड़े सामने आए । पंजीकरण के लिए लगाया गया बिजली बिल संदिग्ध पाया गया। बिल में दर्ज उपभोक्ता संख्या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर निकली, जिससे स्पष्ट हुआ कि दस्तावेज फर्जी थे।फर्म से जुड़े मोबाइल नंबरों की पड़ताल में भी धांधली मिली। एक नंबर बंद पाया गया, जबकि दूसरे नंबर के धारक ने स्पष्ट किया कि उसका फर्म से कोई लेना-देना नहीं है।

बोगस आईटीसी के जरिए सरकारी राजस्व को क्षति

आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस फर्म ने लगभग 4.37 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया। इस टर्नओवर पर करीब 78.81 लाख रुपये का कर बनता था, लेकिन फर्म संचालक ने सरकारी खजाने में पैसा जमा करने के बजाय अन्य संदिग्ध और फर्जी फर्मों से ‘बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) प्राप्त कर अपनी देनदारी को कागजों पर ही समायोजित कर लिया। जांच में माल की खरीद-बिक्री या परिवहन का कोई प्रमाण नहीं मिला; यह पूरा खेल केवल ई-वे बिल और इनवॉइस के जरिए कागजी लेन-देन पर टिका था।

विभाग के नोटिस का नहीं मिला जवाब

राज्य कर विभाग ने आरोपी को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार नोटिस और समन भेजे, लेकिन आरोपी न तो उपस्थित हुआ और न ही कोई दस्तावेज पेश किए। अंततः, अनियमितताओं को देखते हुए फर्म का जीएसटी पंजीकरण निरस्त कर दिया गया और पुलिस में कानूनी शिकायत दर्ज कराई गई।

​बड़े नेटवर्क की तलाश में जांच एजेंसियां

पुलिस अब इस मामले में बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, आईपी एड्रेस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं, बल्कि एक संगठित फर्जी जीएसटी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसी कड़ी में आगरा की अन्य संदिग्ध फर्मों को भी अब जांच के दायरे में लिया गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ होगा और इसमें शामिल दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी।

Dr. Bhanu Pratap Singh