​’नेत्रदान ही महादान’: विश्व नेत्रदान दिवस पर ‘हेल्प आगरा’ ने जगाई अलख, दर्जनों लोगों ने भरे संकल्प पत्र

PRESS RELEASE

​आगरा: मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी बनकर जीने का जज्बा लिए आगरा के समाजसेवियों ने एक सराहनीय पहल की है। ‘विश्व नेत्रदान दिवस’ के अवसर पर बुधवार को मोती कटरा स्थित ‘हेल्प आगरा भवन’ में नेत्रदान संकल्प कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। संस्था ‘हेल्प आगरा’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को नेत्रदान के प्रति जागरूक करना और उन्हें मृत्योपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित करना था।

​नेत्रदान: एक पुनीत कार्य

कार्यक्रम में वक्ताओं ने नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मृत्यु के पश्चात शरीर का कोई मूल्य नहीं रह जाता, लेकिन दान की गई आंखें किसी अंधेरे में डूबे व्यक्ति के जीवन में प्रकाश भर सकती हैं।

हेल्प आगरा के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने भावुक अपील करते हुए कहा, “जो आंखें अग्नि में जलकर नष्ट हो जाएंगी, उन्हें बचाकर किसी दृष्टिहीन के जीवन में उजाला फैलाना सबसे बड़ा धर्म है।” उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे न केवल स्वयं इस पुनीत कार्य का संकल्प लें, बल्कि अपने परिवार और मित्रों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें।

​सरल प्रक्रिया और सामाजिक जागरूकता

संस्था के महासचिव गौतम सेठ ने नेत्रदान की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की जटिलता नहीं है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान के लिए कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होती; मृत्यु की सूचना मिलते ही विशेषज्ञ टीम स्वयं घर पहुँचकर कॉर्निया प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करती है।

​संकल्प लेने वालों में दिखा उत्साह

​कार्यक्रम के दौरान हेल्प आगरा के स्टाफ, मरीजों के तीमारदारों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर संकल्प पत्र भरे। नेत्रदान का संकल्प लेने वालों में प्रमुख रूप से विष्णु यादव, नम्रता यादव (नामनेर) और जलज गोयल (मानपाड़ा) शामिल रहे। इनके अलावा अशोक बंसल, नंदकिशोर गोयल, राजीव गुप्ता, डॉ. मुकुल अग्रवाल, डॉ. विशाल गुप्ता, सुनील प्रभाकर, मनीष गर्ग और जगवीर सिंह ने भी नेत्रदान करने की प्रतिज्ञा ली।

​कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समाज में इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने का संकल्प लिया। हेल्प आगरा की इस पहल ने न केवल नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि आगरा के लोगों में परोपकार की भावना को भी नई ऊर्जा दी है।

Dr. Bhanu Pratap Singh