राम मंदिर चढ़ावा विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- ‘चंपत’ का मतलब है लेकर भागना

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अयोध्या/एटा: अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विपक्षी दलों के हमलों के बाद अब धार्मिक गुरुओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एटा में बड़ा बयान देते हुए कहा कि मंदिर में चोरी शिलान्यास के समय से ही हो रही है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “चंपत का अर्थ ही होता है लेकर भाग जाना।”

पूर्व लेखा प्रभारी का दावा: रोजाना होती थी चोरी

इस विवाद को तब और बल मिला जब मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि मंदिर में चोरी कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक दैनिक प्रक्रिया थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस धांधली की शिकायत चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों से की, तो उन्हें अगले ही दिन पद से हटा दिया गया। यही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि सबूत मिटाने के लिए 8 महीने पुराने सीसीटीवी फुटेज तक डिलीट करवा दिए गए।

​ट्रस्ट के भीतर भी उठ रहे सवाल

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी की जांच तो होनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि जांच करेगा कौन? उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि “जांच करने वाले खुद बेईमान हैं।”

​पीएमओ ने मांगी रिपोर्ट, सियासत तेज

विवाद की शुरुआत सपा नेता पवन पांडेय के उस दावे से हुई, जिसमें उन्होंने 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया था। इस पर अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी को संदिग्ध बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है।

​प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राम मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। वहीं, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बुधवार को ट्रस्ट के सदस्यों के साथ आपात बैठक कर चढ़ावे की राशि और उसके लेखा-जोखा पर चर्चा की है। फिलहाल, यह मामला अब धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

Dr. Bhanu Pratap Singh